जीने की कला सिखाती है सदग्रंथ श्रीरामचरित

जीने की कला सिखाती है सदग्रंथ श्रीरामचरित

प्रतिनिधि : मेदिनीनगर

रजवाडीह गांव के सम्मत टांड स्थित हनुमान मंदिर परिसर में चैत्र नवरात्र एवं रामनवमी के अवसर पर श्री रामचरितमानस नवाह्न पारायण महायज्ञ का आयोजन किया गया है. महायज्ञ के 19वें अधिवेशन में सुबह पूजा-अनुष्ठान और मानस पाठ, वहीं रात्रि में विद्वानों के प्रवचन हो रहे हैं. श्रद्धालुओं की भीड़ इस आयोजन की भव्यता को दर्शाती है.

वाराणसी से पधारे राष्ट्रीय कथावाचक पंडित श्यामल जी मिश्रा ने धर्मशास्त्र के अनेक प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि श्री रामचरितमानस ऐसा सदग्रंथ है, जो मानवता को जीने की कला सिखाता है. उन्होंने आधुनिक समय में मानस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह परिवार, समाज और शासन में नैतिकता, मर्यादा और प्रेम का आदर्श स्थापित करता है, जो आज के दौर में अत्यंत आवश्यक है. चित्रकूट धाम से आयी मानस माधुरी राजकुमारी ने मानव जीवन के उद्देश्य और भगवान की भक्ति पर विस्तार से प्रवचन दिया. उन्होंने कहा कि ईश्वर की असीम कृपा से प्राप्त मानव शरीर का मुख्य उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति है. मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है, इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए, बल्कि परलोक सुधारने के लिए सार्थक पुरुषार्थ करना चाहिए.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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