सदगुरु की सेवा व भक्ति में ही जीवन की सार्थकता : सिंह

गोविंद भवन में विहंगम योग संस्थान द्वारा गुरुवार को प्रथम परंपरा सदगुरु धर्मचंद्र देव जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि श्रद्धा व भक्ति भाव से मनायी गयी.

सदगुरु धर्मचंद्र देव जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि पर आध्यात्मिक गोष्ठी का आयोजन फोटो 10 डालपीएच- 13 प्रतिनिधि : मेदिनीनगर गोविंद भवन में विहंगम योग संस्थान द्वारा गुरुवार को प्रथम परंपरा सदगुरु धर्मचंद्र देव जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि श्रद्धा व भक्ति भाव से मनायी गयी. इस अवसर पर एक विशेष सत्संग गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे. झारखंड प्रदेश महामंत्री ललित कुमार सिंह ने सदगुरु की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन के साथ गोष्ठी का शुभारंभ हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत सदग्रंथ ‘स्वर्वेद’ के पाठ, स्वागत गान व मंगल गान से हुई. कई भक्तों ने वैदिक भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भावविभोर कर दिया. गोष्ठी में वक्ताओं ने सदगुरु धर्मचंद्र देव जी महाराज के महान व्यक्तित्व और उनके आध्यात्मिक योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि विहंगम योग का मूल उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति, त्रय ताप दुखों से मुक्ति एवं परमानंद की अनुभूति है. यह तभी संभव है जब मनुष्य सदगुरु की शरण में रहकर ब्रह्मविद्या की साधना करे और दीनता से भक्ति भाव अपनायें. महामंत्री श्री सिंह ने जीवन की सार्थकता सदगुरु की सेवा और भक्ति में निहित बतायी. उन्होंने भक्तजनों को सदगुरु के जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाते हुए सेवा व साधना के लिए प्रेरित किया. गोष्ठी में भानु प्रताप देव, राजेन्द्र प्रसाद अरोड़ा सहित अन्य वक्ताओं ने भी विहंगम योग के सिद्धांतों पर चर्चा की. मौके पर शिवकुमार सिंह, विष्णुदेव मेहता,शांति पांडेय,रेणु सिंह, गायत्री देवी,पुष्पा उपाध्याय, निर्मला,शंभु कुमार सहित काफी संख्या भक्तजन शामिल रहे.

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Author: VIKASH NATH

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