हाल चुरादोहर हाई स्कूल का : दूषित जल पीने को मजबूर है विद्यार्थी

सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि वह सुदूरवर्ती इलाकों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है,

शिक्षक की कमी से प्रभावित हो रही 258 बच्चों की पढ़ाई रामनरेश तिवारी, पाटन : सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि वह सुदूरवर्ती इलाकों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन पाटन प्रखंड के चुरादोहर स्तरोन्नत उच्च विद्यालय की स्थिति इन दावों की पोल खोलती है. प्रखंड मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित यह गांव कभी घोर उग्रवाद प्रभावित रहा है. बदलते परिवेश में अब यहां की स्थिति सामान्य हो चुकी है और सरकार विकास व शिक्षा का बेहतर वातावरण तैयार करने का प्रयास कर रही है. बावजूद इसके, सुविधाओं और संसाधनों के अभाव में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. हाई स्कूल का दर्जा तो दिया, लेकिन सुविधा नहीं विद्यालय को अपग्रेड कर हाई स्कूल का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर नहीं की गयी. वर्तमान में विद्यालय में 258 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. कक्षा एक से पांच तक 59 बच्चे हैं, जिनकी पढ़ाई एकमात्र शिक्षक विजयकांत प्रजापति के भरोसे चल रही है. वे प्रधानाध्यापक का प्रभार भी संभालते हैं. कक्षा छह से आठ तक 104 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन इन कक्षाओं के लिए कोई शिक्षक पदस्थापित नहीं किया गया है. नतीजतन इन बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप है. कक्षा नौ और दस में 95 बच्चे पढ़ते हैं, जिनके लिए केवल दो शिक्षक उपलब्ध हैं. एक संस्कृत पढ़ाते हैं और दूसरा इतिहास व नागरिक शास्त्र. गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई शिक्षक के अभाव में नहीं हो पाती. इस कारण कई बच्चे मजबूर होकर दूसरे विद्यालयों में दाखिला ले रहे हैं. पेयजल संकट विद्यालय परिसर में लगे दोनों चापाकल खराब हो चुके हैं क्योंकि यह क्षेत्र ड्राई ज़ोन के अंतर्गत आता है. राहत के लिए एक जलमीनार बनायी गयी है, लेकिन उसका कोई लाभ बच्चों को नहीं मिल रहा. जलमीनार को भरने के लिए कुएं से मोटर जोड़ा गया है, जिससे छात्रों को दूषित और गंदा पानी पीना पड़ता है. इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराता रहता है. बिजली का कनेक्शन तक नहीं सरकार एक ओर डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस विद्यालय में बिजली का कनेक्शन तक नहीं है. बिजली के अभाव में आइसीटी लैब और कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं. बच्चे कंप्यूटर शिक्षा से पूरी तरह वंचित हैं. विद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण प्रधानाध्यापक विजयकांत प्रजापति बताते हैं कि सभी समस्याओं को लेकर विभागीय अधिकारियों को कई बार पत्राचार किया गया है. विद्यालय की भूमि पर कुछ ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर लिया है. मुखिया ने अतिक्रमणकारियों से बात की थी. उन्होंने कहा था कि यदि उन्हें आवास मिल जाये तो वे स्वयं ही भूमि खाली कर देंगे.

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Author: VIKASH NATH

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