Superstition: पलामू जिले के मोहम्मदगंज प्रखंड में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बावजूद अंधविश्वास आज भी ग्रामीण जीवन पर भारी पड़ रहा है. अशिक्षा, जागरूकता की कमी और आर्थिक मजबूरियों के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमारी या अन्य समस्याओं के समाधान के लिए अस्पतालों के बजाय कथित बाबा, ओझा और तांत्रिकों के दरबार में पहुंच रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस अंधविश्वास का फायदा उठाकर कई लोग भोले-भाले परिवारों का आर्थिक और मानसिक शोषण कर रहे हैं.
कई गांवों में फैल चुका है झाड़-फूंक का कारोबार
स्थानीय जागरूक ग्रामीणों के अनुसार, मोहम्मदगंज क्षेत्र के सिंचाई कॉलोनी, भजनिया, नवका डीह, कादल कुर्मी, निमतर और गोला पत्थर सहित कई गांवों में झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र का कारोबार खुलेआम चल रहा है. यहां कथित ओझा, ढोंगी बाबा और कुछ महिलाएं भी खुद को चमत्कारी शक्ति का दावा करते हुए लोगों का इलाज करने का भरोसा देती हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि ये लोग बीमारी, पारिवारिक विवाद, संतान प्राप्ति, रोजगार और अन्य परेशानियों का समाधान करने का दावा करते हैं. इसके लिए लोगों से मोटी रकम, पूजा सामग्री और अन्य वस्तुएं भी ली जाती हैं.
'पर्ची वाले बाबा' के दरबार में जुट रही भीड़
क्षेत्र में इन दिनों कथित "पर्ची वाले बाबा" की भी काफी चर्चा है. बताया जाता है कि दूर-दूर से लोग उनके दरबार में अपनी समस्याओं का समाधान खोजने पहुंच रहे हैं. कई ओझा और तांत्रिक भी वहां जाकर कथित आशीर्वाद या पर्ची लेने के बाद ग्रामीणों के बीच अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बीमारी का वैज्ञानिक इलाज कराने के बजाय लोग ऐसे दावों पर भरोसा कर समय और पैसा दोनों गंवा रहे हैं.
स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि अंधविश्वास की जड़ अशिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की कमी है. उनका कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाओं को मजबूत करने, नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाने और गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि लोग समय पर चिकित्सकीय उपचार प्राप्त करें.
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ग्रामीणों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
जागरूक ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि झाड़-फूंक के नाम पर लोगों को गुमराह कर आर्थिक शोषण करने वालों के खिलाफ जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए. उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो अंधविश्वास का यह जाल और फैलता जाएगा, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवार सबसे अधिक प्रभावित होंगे. साथ ही ग्रामीणों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या होने पर प्रशिक्षित चिकित्सकों से इलाज कराएं और अप्रमाणित दावों के बजाय वैज्ञानिक चिकित्सा पर भरोसा करें.
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