गैस संकट से जंगलों पर बढ़ा दबाव, लकड़ी पर लौटे लोग, पर्यावरण पर खतरा

पलामू में एलपीजी किल्लत का असर, ग्रामीण-शहरी इलाकों में तेज हुई पेड़ों की कटाई

पलामू में एलपीजी किल्लत का असर, ग्रामीण-शहरी इलाकों में तेज हुई पेड़ों की कटाई

प्रभात खबर टीम, मेदिनीनगर

पश्चिमी एशिया में बिगड़े हालात का असर अब देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ पलामू के जनजीवन पर भी साफ दिखने लगा है. रसोई गैस की किल्लत ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में नया संकट खड़ा कर दिया है. हालात ऐसे हो गये हैं कि लोग एक बार फिर पारंपरिक ईंधन लकड़ी पर निर्भर होने को मजबूर हैं, जिसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है. पहले से जारी जंगलों की अंधाधुंध कटाई में अब बेतहाशा वृद्धि देखी जा रही है. ईंधन को लेकर लोगों में भय का माहौल है, जिसके कारण वे भविष्य के लिए भी लकड़ी इकट्ठा करने में जुट गये हैं. रोजाना कुल्हाड़ी लेकर जंगल की ओर जाना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है. जब गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध था, तब लोग ईंधन को लेकर निश्चिंत थे. लेकिन अब खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग पूरी तरह जंगलों पर निर्भर हो गये हैं. इससे अवैध कटाई तेजी से बढ़ रही है और जंगल सिमटते जा रहे हैं.

हालांकि वन विभाग कटाई नहीं होने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि सूखी लकड़ी के नाम पर भी बड़े पैमाने पर जंगलों पर दबाव बढ़ा है. जिन पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में पहले ही पेड़ों की संख्या कम थी, वहां की स्थिति अब भयावह हो गयी है. कई जगह पहाड़ लगभग वृक्षविहीन नजर आने लगे हैं. जंगलों पर बढ़ते दबाव का असर वन्यजीवों के आवास पर भी पड़ रहा है, जिससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित होने की कगार पर है. लकड़ी जलाने से निकलने वाला धुआं और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे हानिकारक तत्वों का स्तर भी बढ़ने की आशंका है. घरों के भीतर लकड़ी का धुआं महिलाओं और बच्चों में फेफड़ों और आंखों की गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है.

पांडू: पांडू प्रखंड में गैस की किल्लत के बाद जंगलों की कटाई में तेजी आयी है. पहले से जारी कटाई अब और तेज हो गयी है. अनुमान है कि प्रतिदिन हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं. स्थिति यह है कि लोग खाना बनाने के लिए महंगे दाम पर लकड़ी खरीदने को मजबूर हैं.

तरहसी-मनातू: तरहसी और मनातू क्षेत्रों में भी गैस संकट के कारण लोगों का एकमात्र सहारा लकड़ी बन गया है. सड़कों और पगडंडियों पर लोग साइकिल और बाइक से लकड़ी ढोते नजर आ रहे हैं. इससे जंगलों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.

छतरपुर: छतरपुर क्षेत्र में भी घरेलू गैस की किल्लत ने लोगों को जंगलों की ओर धकेल दिया है. ग्रामीण अपने आसपास के जंगलों से लकड़ी काट रहे हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जतायी जा रही है.

विश्रामपुर. विश्रामपुर के ग्रामीण इलाकों में एलपीजी की कमी से लोग पूरी तरह लकड़ी पर निर्भर हो गये हैं. लोग जलावन की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं और जो भी लकड़ी मिल रही है, उसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.

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Published by: Akarsh aniket

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