पाटन का एकमात्र बालिका हाईस्कूल कागज पर संचालित, धरातल पर छह साल से बंद

पाटन का एकमात्र प्रोजेक्ट सरस्वती बालिका उच्च विद्यालय पिछले छह वर्षों से बंद है. कागज पर संचालित यह स्कूल अब खंडहर में तब्दील हो गया है. निरीक्षण के बावजूद इसे खोलने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो रही है.

पाटन से रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट

पाटन: प्रखंड में बालिकाओं के लिए एकमात्र प्रोजेक्ट सरस्वती बालिका उच्च विद्यालय पिछले छह वर्षों से ताले में बंद है. विद्यालय कागज पर संचालित है, लेकिन धरातल पर न शिक्षक हैं, न कर्मी और न ही छात्राएं. रख-रखाव के अभाव में विद्यालय भवन जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो गया है. चहारदीवारी के अंदर खाली पड़ी जमीन में घास उग आयी है और विद्यालय परिसर जहरीले जीव-जंतुओं का बसेरा बन गया है.

यह विद्यालय वर्तमान राज्य के वित्त मंत्री व स्थानीय विधायक राधाकृष्ण किशोर की माता जी के नाम से संचालित है. विद्यालय का भवन तीन बार बनाया गया. पहली बार वर्ष 1984-85 में एलजीपी मद से, दूसरी बार सरकार की ओर से और तीसरी बार विधायक निधि की राशि से दो कमरों का निर्माण कराया गया था. लाखों रुपये की लागत से बने भवन का वर्तमान में कोई उपयोग नहीं हो रहा है.

वर्ष 1982 में हुई थी विद्यालय की स्थापना

प्रखंड मुख्यालय में प्रोजेक्ट सरस्वती बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना वर्ष 1982 में हुई थी. विद्यालय को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा नौ शिक्षक, दो आदेशपाल और एक लिपिक की बहाली की गयी थी. इनमें एक शिक्षक बृजमोहन मिश्रा, एक लिपिक विजय सिंह और दो आदेशपाल देवेंद्र राम व मुक्तेश्वर सिंह की सेवा को सरकार द्वारा मान्यता दी गयी. इनका नियमित रूप से भुगतान भी किया गया.

बाद में सभी सेवानिवृत्त हो गये. इसके बाद सुरेंद्र पांडेय व कलीम खान की पदस्थापना की गयी. लेकिन कलीम खान का आकस्मिक निधन हो गया, जबकि सुरेंद्र पांडेय का अन्य विद्यालय में स्थानांतरण हो गया. इसके बाद विद्यालय में न शिक्षक बचे और न कोई कर्मी.

अंतिम बार 2018 में हुई थी परीक्षा

विद्यालय में अंतिम बार वर्ष 2018 में छात्राओं ने परीक्षा लिखी थी. इसी वर्ष अंतिम परीक्षाफल भी घोषित किया गया था. इसके बाद विद्यालय में शैक्षणिक कार्य बंद हो गया.

वर्ष 2023 से पूरी तरह बंद है विद्यालय

वर्ष 2023 से विद्यालय में पूरी तरह ताला लटका हुआ है. रख-रखाव के अभाव में भवन जर्जर हो गया है. भवन की खिड़की और दरवाजे गायब हैं. कमरों के अंदर और बाहर घास-फूस का अंबार लगा हुआ है. परिसर में जहरीले जीव-जंतुओं का बसेरा बना हुआ है.

निरीक्षण के बाद भी नहीं खुला विद्यालय

पिछले वर्ष नवंबर-दिसंबर में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी सौरभ प्रकाश ने विद्यालय का निरीक्षण किया था. इस दौरान उन्होंने जल्द विद्यालय खुलवाने और शिक्षण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया था. लेकिन यह आश्वासन तक ही सीमित रह गया. इसके बाद उनका यहां से स्थानांतरण हो गया.

कागज पर संचालन, धरातल पर ताला

पाटन का प्रोजेक्ट सरस्वती बालिका उच्च विद्यालय कागज पर संचालित है, लेकिन धरातल पर पूरी तरह बंद है. विद्यालय के सभी भवन जर्जर हो चुके हैं. बालिकाओं की शिक्षा के लिए स्थापित यह विद्यालय वर्षों से बंद पड़ा है, लेकिन इसे दोबारा शुरू करने को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है.


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लेखक के बारे में

By अपूर्व कुमार शुक्ला

अपूर्व कुमार शुक्ला युवा पत्रकार हैं. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स और नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय,पलामू से बैचलर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता से पहले वे करीब एक दशक तक सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी से जुड़े रहे, इस दौरान भारतीय और विशेष रूप से झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और नीतिगत विषयों का गहन अध्ययन किया. पत्रकारिता की शुरुआत खबर मंत्र संस्थान में रिपोर्टर के रूप में की, जहां झारखंड के प्रमुख नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और एक्टिविस्ट के साक्षात्कार किए. वर्तमान में प्रभात खबर में खबर लेखन और संपादन से जुड़े हैं. उनकी पत्रकारिता जनसरोकार, तथ्यपरकता और मुद्दों की गहराई पर केंद्रित है.

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