पलामू के स्वतंत्रता सेनानी यदुवंश सहाय व अमिये घोष के नाम पर आयुक्त से सड़क का नामकरण करने की मांग

पलामू के स्वतंत्रता सेनानी यदुवंश सहाय और अमिय घोष के नाम पर सड़कों और सार्वजनिक स्थलों का नामकरण करने की मांग, आयुक्त ने दिए कार्रवाई के निर्देश।

चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट मेदिनीनगर. पलामू के महान स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान सभा के सदस्यों की स्मृति को स्थायी रूप से संरक्षित करने की दिशा में प्रशासनिक पहल शुरू हुई है. झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य सह अधिवक्ता हृदयानंद मिश्र के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को पलामू प्रमंडल की आयुक्त कुमुद सहाय से मुलाकात की और उन्हें मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधिमंडल ने महापुरुषों के नाम पर सार्वजनिक स्थलों का नामकरण करने, उनकी आदमकद प्रतिमाएं स्थापित करने और पलामू संवैधानिक विरासत केंद्र बनाने की मांग की.

आयुक्त ने तत्काल लिया संज्ञान

प्रतिनिधिमंडल की मांगों पर आयुक्त कुमुद सहाय ने तत्काल संज्ञान लिया. उन्होंने मामले के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए हृदयानंद मिश्र के ज्ञापन को आवश्यक कार्रवाई के लिए पलामू उपायुक्त और मेदिनीनगर नगर निगम के नगर आयुक्त को अग्रसारित कर दिया. आयुक्त की इस पहल का प्रतिनिधिमंडल ने स्वागत किया. सदस्यों ने उम्मीद जतायी कि जिला प्रशासन और नगर निगम जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक कदम उठायेंगे.

मोहल्ले और सड़क के नाम बदलने का प्रस्ताव

ज्ञापन में मेदिनीनगर के कुछ ऐतिहासिक स्थलों और सड़कों का नाम महापुरुषों के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया गया है. इसके तहत जेल-हाता मोहल्ले का नाम बदलकर यदुवंश नगर (यदु बाबू) करने की मांग की गयी है. वहीं सेवा सदन रोड का नाम अमिय कुमार घोष रोड (गोपा बाबू) रखने का प्रस्ताव दिया गया है.

प्रमुख स्थल पर लगायी जाये आदमकद प्रतिमाएं

प्रतिनिधिमंडल ने शहर के किसी प्रमुख और व्यस्त सार्वजनिक स्थल पर दोनों स्वतंत्रता सेनानियों की आदमकद प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग की है. प्रतिमाओं के पास परिचयात्मक शिलापट्ट लगाने का भी प्रस्ताव दिया गया है. इसमें उनके जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान निर्माण में योगदान की जानकारी दर्ज करने की बात कही गयी है.

बने पलामू संवैधानिक विरासत केंद्र

हृदयानंद मिश्र ने मेदिनीनगर में पलामू संवैधानिक विरासत केंद्र या कॉर्नर स्थापित करने का सुझाव दिया है. केंद्र में दोनों महापुरुषों से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, तस्वीरें, ऐतिहासिक संस्मरण और अन्य अभिलेखीय सामग्री प्रदर्शित करने की योजना है. उन्होंने कहा कि ऐसा केंद्र बनने से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और युवा पीढ़ी को पलामू के स्वतंत्रता आंदोलन और देश के संवैधानिक इतिहास को समझने में मदद मिलेगी. इससे नई पीढ़ी अपनी ऐतिहासिक जड़ों से भी जुड़ सकेगी.

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ऐतिहासिक विरासत को बचाना सामूहिक जिम्मेदारी

अधिवक्ता हृदयानंद मिश्र ने कहा कि यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष केवल पलामू के ही नहीं, बल्कि देश की संवैधानिक विरासत के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं. उन्होंने कहा कि पलामू की धरती ने स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतंत्र को कई महान नायक दिये हैं. ऐसी ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि महान राष्ट्रनिर्माताओं को सम्मान देना किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का सामूहिक और नैतिक दायित्व है.

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प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल

प्रतिनिधिमंडल में हृदयानंद मिश्र के साथ मेदिनीनगर के वरिष्ठ नागरिक एवं स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र तथा पलामू एटा के अध्यक्ष प्रेम भसीन, यदुवंश सहाय के पौत्र सुधीर सहाय, झारखंड प्रदेश शिक्षा विभाग के स्टेट चेयरमैन श्याम नारायण सिंह, डॉ सुमित मिश्रा, नवल किशोर सिंह, महिला कांग्रेस नेत्री सुमन तिर्की, पलामू जिला कांग्रेस महासचिव जतरू उरांव और संजीव कुमार मिश्रा समेत कई गणमान्य लोग शामिल रहे.


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By Chandra shekhar singh

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