राम नरेश तिवारी की रिपोर्ट
पाटन (पलामू) : प्रखंड के किशुनपुर स्थित प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय में एक सितंबर से ताला लटक रहा है. पशु चिकित्सालय के बंद रहने से क्षेत्र के पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है. मवेशियों के इलाज और दवा के लिए पशुपालक चिकित्सालय पहुंच रहे हैं, लेकिन ताला बंद देख उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है. पशुपालकों का कहना है कि बरसात के मौसम में मवेशियों में कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं. ऐसे समय में सरकारी पशु चिकित्सालय का बंद रहना उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है. समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण पशुपालकों को निजी स्तर पर पशु चिकित्सकों की तलाश करनी पड़ रही है.
झोलाछाप पशु चिकित्सकों के भरोसे पशुपालक
पशु चिकित्सालय बंद होने के कारण कई पशुपालक कथित झोलाछाप पशु चिकित्सकों के चंगुल में फंसने को मजबूर हैं. पशुपालकों का आरोप है कि ऐसे लोगों के पास पशु चिकित्सा से संबंधित पर्याप्त जानकारी और डिग्री नहीं होती, इसके बावजूद वे मवेशियों का इलाज कर रहे हैं. इलाज के नाम पर पशुपालकों से अधिक पैसे भी लिए जा रहे हैं. पशुपालकों का कहना है कि गलत इलाज के कारण कई मवेशियों की जान तक जा चुकी है. इसे लेकर पशुपालकों और कथित झोलाछाप पशु चिकित्सकों के बीच कई बार विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो चुकी है. ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी पशु चिकित्सालय के बंद रहने से उन्हें मजबूरी में ऐसे लोगों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
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सरकार के निर्देश पर बंद चिकित्सालय
इस संबंध में पाटन के पशु चिकित्सक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि किशुनपुर स्थित प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय को सरकार के स्तर से ही बंद कर दिया गया है. वहां कार्यरत कर्मी को जिला मुख्यालय बुला लिया गया है. उन्होंने बताया कि चिकित्सालय बंद होने का कारण विभागीय स्तर का निर्णय है.
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जल्द बहाल हो पशुओं के इलाज की व्यवस्था
पशुपालकों ने विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि क्षेत्र में पशुओं के इलाज की समुचित व्यवस्था जल्द बहाल की जाए, ताकि उन्हें मवेशियों के इलाज के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े.
