शिवेंद्र कुमार
मेदिनीनगर. जिले में जेएसएलपीएस के द्वारा बुजुर्गों के लिए स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) बनाया जा रहा है. अभी तक 403 स्वयं सहायता समूह बना लिया गया है. जिससे 3536 लोगों को जोड़ा गया है. इसमें 55 साल से अधिक आयु के लोगों को जोड़ना है. जिनकी संख्या कम से कम पांच और अधिकतम 20 हो सकती है. 44 समूह को जेएसएलपीएस के माध्यम से प्रत्येक समूह को 30 हजार का रिवाल्विंग फंड दिया गया है. 44 समूह को 13 लाख 20 हजार दिया गया है. जबकि 55 ऐसे समूह है. जिन्हें सामुदायिक निवेश निधि के माध्यम से प्रत्येक समूह को लगभग एक लाख दिया गया है. जेएसएलपीएस के माध्यम ऐसे समूह को करीब 55 लाख रुपए दिए गये हैं.
बुजुर्ग स्वयं सहायता समूह बनाने का क्या है उद्देश्य
एक रिपोर्ट के अनुसार पूरे झारखंड में 70 फीसदी बुजुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं. इनमें से 93 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र में है. जीवित रहने के लिए बुजुर्गों को अपने आखिर दिनों तक काम करना पड़ता है. इसका मुख्य उद्देश्य बुजुर्ग लोगों के लिए जीवन की स्थिति में सुधार करना है. बुजुर्गों में सामाजिक समर्थन के साथ उनके गतिविधियों को सुविधाजनक बनाना है. बुजुर्ग स्वयं सहायता समूह बनाकर एक दूसरे के सहायक बन सकते हैं. जिन बुजुर्गों को सहायता की आवश्यकता है. उनके लिए सहायता उपलब्ध कराना है.
जेएसएलपीएस के माध्यम से कई बुजुर्ग अपना व्यापार भी शुरू कर चुके हैं
केस स्टडी 1
हुसैनाबाद पंचायत बनियाडीह के श्याम बुजुर्ग आजिविका स्वयं सहायता समूह के कोषाध्यक्ष रामभजन मेहता 75 वर्ष के है. ये बुजुर्ग समूह से ढाई साल से जुड़े हुए हैं. वे 40 हजार रुपए लोन लेकर किराना दुकान खोले हैं. इनको चलने फिरने व बैठने मे काफी दिक्कत होती है. जिसके कारण दूकान चलाते हैं.
केस स्टडी 2
लेस्लीगंज प्रखंड के कुराइनपतरा में पान बुजुर्ग समूह बनाया गया. इसके सदस्य हुसैनी साव समुह से जुड़कर नौ हजार का ऋण लिया. जिसमें वह लोहे, पीतल, चांदी के धातु से बने सामान को बेचते हैं. अपना जीवन की हर छोटी-मोटी जरूरत को पूरा करते हैं.
केस स्टडी 3
75 वर्षीय लालती देवी बनियाडीह के सेव बुजुर्ग आजिविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य है. बुजुर्ग समूह में ढाई साल से जुड़ी हुई हैं. अब वे सामुदायिक निवेश निधि से 20 हजार लेकर अपना आजिविका बढ़ाने के लिए स्वयं बकरी पालन कर रही है.
केस स्टडी 4
कामत के 66 वर्षीय रामउदेश मेहता ढाई साल से बुजुर्ग समूह मे जुड़े हुए हैं. अब वे अपना आजिविका बढ़ाने के लिए सामुदायिक निवेश निधि से 50 हजार लोन लेकर बकरी पालन व सब्जी की खेती कर रहे हैं.
