जिला के सरकारी कार्यालयों पर 10 करोड़ से अधिक का बिजली बिल बकाया

.पलामू जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों पर 10 करोड़ से अधिक का बिजली बिल बकाया है.

मेदिनीनगर.पलामू जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों पर 10 करोड़ से अधिक का बिजली बिल बकाया है. विभाग वसूली नहीं कर पा रहा है. सबसे अधिक बकाया उत्तर कोयल के कार्यपालक अभियंता के नाम पर तीन करोड़ 75 लाख 16 हजार 439 रुपये बकाया है. ऐसे कई सरकारी विभाग हैं. जिन पर लाखों का बकाया है. स्वास्थ्य विभाग पर एक करोड़ 78 लाख 59 हजार 161 है. इसके बाद पीएचइडी विभाग के पास एक करोड़ 46 लाख 22 हजार 97 रुपया है. यदि प्रशासनिक विभाग की बात करें, तो आयुक्त कार्यालय के नाम से सात लाख 50 हजार 658 रुपए बकाया है. जिला प्रशासन के अधीन विभिन्न कार्यालय पर 59 लाख 66 हजार 687, पुलिस प्रशासन के विभिन्न कार्यालय पर 35 लाख 71 हजार 387 रुपए बकाया है, जबकि रजिस्ट्री कार्यालय पर दो लाख 69 हजार 358 रुपये का बिजली बिल बकाया है. हरिजन छात्रावास पर दो लाख 81 हजार 662 रुपये, पीडब्ल्यूडी के कार्यपालक अभियंता पर 85 हजार 42 बकाया है. पांकी के रूरल वाटर सप्लाई के नाम पर करीब 50 लाख से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है. बिजली बिल के बकाये की वसूली के लिए बिजली विभाग ने फरवरी में ही सभी संबंधित विभाग को नोटिस भी दिया है. लेकिन नोटिस देने के दो माह के बाद भी अभी तक बिजली बिल जमा नहीं किया गया है. बिजली विभाग भी वसूली कर पाने में सक्षम नहीं हो पा रहा है. सरकारी कार्यालय और अधिकारियों के क्वार्टर से बिजली बिल की वसूली नहीं हो पाती है. इसके अलावा जिले में कई ऐसे रसूखदार व्यक्ति भी हैं. जिन पर बिजली बिल का काफी बकाया है. जिस कारण बिजली विभाग को राजस्व की प्राप्ति नहीं हो रही है. कई लोगों का कहना है कि यही अगर आम लोगों का बिजली बिल बकाया होता, तो उनका कनेक्शन काट दिया जाता है.

दूसरों के नाम से बिजली का कनेक्शन ले रखे हैं बकायेदार

जानकारी के अनुसार इनमें कई लोगों का लाइन काट दिया गया है. लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं. जो बिल ज्यादा होने पर फिर दूसरे के नाम से बिजली का कनेक्शन लिये हुए हैं. इसको बिजली विभाग को देखने की जरूरत है. जबकि बिजली विभाग लोगों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए दिन-रात काम कर रहा है. अभी यदि शहर की बात करें, तो औसतन 22 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है. जबकि सदर अस्पताल में साढ़े 23 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है. इसीलिए सदर अस्पताल का अलग फीडर बनाया गया है. ताकि बिजली आपूर्ति में किसी तरह की परेशानी न होगी.

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Published by: Satyaprakash pathak

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