जरूरत से कम पहुंचे धान बीज, बाजार में तिगुने दर तक खरीदना मजबूरी

पाकुड़ में धान के बीजों का संकट, किसानों की बढ़ी मुश्किलें. डीएओ ने कहा, लैंप्सों ने नहीं भेजी अतिरिक्त डिमांड, अब वितरण मुश्किल.

रमेश भगत, पाकुड़. पाकुड़ जिले में लगातार हो रही बारिश के बाद किसानों ने धान के बीजों की छिटाई शुरू कर दी है, लेकिन सरकारी दर पर बीजों की कमी ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं. जिले के कई लैंप्स में धान के बीज तो बेचे गये, लेकिन सिर्फ 1050 क्विंटल धान के बीज की ही आपूर्ति हो पाई, जबकि आवश्यकता 3150 क्विंटल की थी. किसानों को ये बीज ₹19.50 प्रति किलो की दर से मिले, जो कि एक बड़ी राहत थी. हालांकि, अधिकतर किसान इस सरकारी सुविधा का लाभ नहीं उठा पाये. उन्हें मजबूरी में बाजार से ₹50 से ₹60 प्रति किलो की ऊंची दर पर धान के बीज खरीदने पड़ रहे हैं. यह उनके लिए एक बड़ा आर्थिक झटका है, क्योंकि इससे उनकी खेती की लागत काफी बढ़ जाती है और मुनाफ़ा कम हो जाता है. जिले के लैंप्स द्वारा कम डिमांड भेजने के कारण यह समस्या और भी गंभीर हो गयी है.

आलुबेड़ा लैंप्स: सीमित किसानों को ही मिल पाया लाभ :

प्रखंड सहकारिता कार्यालय परिसर स्थित आलूबेड़ा लैंप्स लिमिटेड से वर्ष 2025 में कुल 230 किसानों के बीच धान बीज वितरित किया गया. लैंप्स सदस्य सचिव राजेश दास ने बताया कि हिरणपुर नोडल से कुल 100 क्विंटल धान बीज की आपूर्ति मिली थी, जिसे ₹19.50 प्रति किलो की दर से वितरित किया गया. यह प्रयास निश्चित रूप से कुछ किसानों के लिए राहत लेकर आया, लेकिन प्रखंड के हजारों किसान अब भी सरकारी दर पर धान बीज से वंचित हैं. उन्हें भी बाजार से महंगे बीज खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है.

किसानों की मांग: पारदर्शिता और पर्याप्त आपूर्ति :

किसानों का कहना है कि हर साल सरकारी बीज का लाभ सीमित लोगों को ही मिलता है, जबकि अधिकांश किसान बाजार की ऊंची कीमतों पर निर्भर हो जाते हैं. इससे उनकी खेती की लागत बढ़ जाती है और संभावित मुनाफा घट जाता है. स्थानीय कृषकों ने लैंप्स के माध्यम से बीज की आपूर्ति में पारदर्शिता लाने और आगामी वर्षों में आपूर्ति की मात्रा बढ़ाकर हर जरूरतमंद किसान तक कम दर पर बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है. उनकी यह मांग वाजिब है, क्योंकि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और बीजों की कमी उन्हें सीधे तौर पर प्रभावित करती है. इस समस्या का समाधान न केवल किसानों के लिए आर्थिक स्थिरता लाएगा, बल्कि जिले की कृषि उपज को भी बढ़ावा देगा. क्या आपको लगता है कि सरकार को इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए और अधिक ठोस कदम उठाने चाहिए.

क्या कहते हैं किसान :

लैंप्स में उन्नत धान का बीज सब्सिडी रेट पर मिलता है, जबकि बाजार में काफी ऊंचा दाम रहता है. यदि लैंप्स से किसानों को धान का बीज मिल पाता तो हमें काफी सुविधा होती और पैसे की भी बचत होती.

– राजेश हांसदा

लैंप्स में धान का बीज बाजार से काफी कम दाम पर उपलब्ध रहता है. लैंप्स में किसानों को बीज 50 फीसदी सब्सिडी पर मिलता है. लेकिन बाजार में 60 रुपये किलो खरीदना पड़ता है, जिससे हमें काफी खर्च करना पड़ जाता है.

– गंगाराम ठाकुर

क्या कहते हैं जिला कृषि पदाधिकारी :

जिले के लैंप्सों द्वारा 1050 क्विंटल धान के बीज की डिमांड की गयी थी, जिसकी आपूर्ति हो चुकी है. लैंप्सों ने अतिरिक्त डिमांड नहीं करने के कारण बीज वितरित नहीं हो पायेगा. अब ज्यादातर किसान धान के बीज का छिड़काव कर चुके हैं.

– मृत्युंजय कुमार, डीएओB

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Author: BINAY KUMAR

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