लिट्टीपाड़ा : स्वस्थ, रोगमुक्त और गुणवत्तापूर्ण तसर रेशमकीट बीज के उपयोग के महत्व को लेकर प्रखंड के दारिकुड़िया गांव में किसानों का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया. प्रशिक्षण का संचालन गौथमी, वैज्ञानिक-बी, बीएसएमटीसी काठीकुंड ने दास कुमार एक्का, एडीआई, संथाल परगना, दुमका के समन्वय से किया.
बीज प्रबंधन की दी जानकारी
किसानों को तसर अंडों और डीएफएल के उचित रख-रखाव, सुरक्षित परिवहन, भंडारण, ऊष्मायन और बेहतर अंडा स्फुटन के लिए उपयुक्त वातावरण बनाने की जानकारी दी गयी. स्वच्छता, अंडों और नवजात लार्वा को यांत्रिक क्षति से बचाने तथा उचित ब्रशिंग प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया.
रोग रोकथाम पर दिया जोर
किसानों को रोग की रोकथाम, खराब या असामान्य बीज की प्रारंभिक पहचान और समस्याओं की समय पर तकनीकी अधिकारियों को जानकारी देने के लिए जागरूक किया गया.
उत्पादन बढ़ाने पर फोकस
दास कुमार एक्का ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य वैज्ञानिक तसर बीज रख-रखाव और प्रबंधन संबंधी ज्ञान व कौशल मजबूत करना है, ताकि अंडा स्फुटन, लार्वा जीवितता, कोकून उत्पादन और तसर रेशम उत्पादकता बढ़ सके.
