प्रतिनिधि, हिरणपुर. प्रखंड क्षेत्र में रेशम उत्पादन एवं कोकूनोत्तर गतिविधियों से जुड़ी कुशल महिला प्रतिभागियों के लिए कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. प्रशिक्षण का उद्देश्य रेशम उत्पादन से जुड़ी महिलाओं के तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को बढ़ाना रहा, ताकि वे बेहतर गुणवत्ता का टसर रेशम तैयार कर अपनी आय और आजीविका के अवसर बढ़ा सकें.
कार्यक्रम का संचालन बीएसएमटीसी काठीकुंड की वैज्ञानिक-बी सुश्री गौथमी ने रेशम विभाग (डीओएस), लिट्टीपाड़ा, पाकुड़ के समन्वय से किया.
प्रशिक्षण के दौरान महिला प्रतिभागियों को कोकून की छंटाई और ग्रेडिंग, कुकिंग व सॉफ्टनिंग, रीलिंग, रेशम फिलामेंट की उचित हैंडलिंग, वाइंडिंग, सुखाने और भंडारण की तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी.
रेशम की गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष जोर
प्रशिक्षण में बेहतर गुणवत्ता वाले रेशम उत्पादन के लिए कोकूनोत्तर तकनीकों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया. प्रतिभागियों को रीलिंग के दौरान स्वच्छता बनाए रखने और फिलामेंट टूटने की समस्या को कम करने के तरीके भी बताए गये.
इसके अलावा रेशम अपशिष्ट को कम करने तथा रेशम के फिलामेंट में समानता और स्वच्छता बनाए रखने की तकनीक समझायी गयी.
उन्नत तकनीक से बढ़ेगा बाजार मूल्य
प्रशिक्षकों ने बताया कि कोकून की उचित हैंडलिंग और उन्नत रीलिंग तकनीक अपनाने से रेशम की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है. इससे तैयार रेशम के बाजार मूल्य में भी बढ़ोतरी की संभावना रहती है.
प्रशिक्षण के दौरान रेशम उत्पादों में मूल्य संवर्धन के जरिए महिलाओं की आय बढ़ाने और उनके लिए अतिरिक्त आजीविका के अवसर विकसित करने पर भी चर्चा की गयी.
आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए किया प्रेरित
प्रशिक्षण में महिला प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया. उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाले टसर रेशम के उत्पादन के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने और उत्पादन प्रक्रिया में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया गया.
आय और रोजगार से जोड़ने वाली ऐसी तकनीकी जानकारी से रेशम उत्पादन से जुड़ी महिलाओं को अपने काम को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
