प्रतिनिधि, पाकुड़ : पचुवाड़ा कोल माइंस से पाकुड़ रेलवे साइडिंग तक कोयला ढुलाई के दौरान कोयला चोरी का कथित खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है. कोल लिंक रोड पर कई जगहों पर कोयला लदे डंपरों को रोककर उनसे कोयला उतारे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं. उतारे गए कोयले को साइकिल और मोटरसाइकिल के जरिये आसपास के क्षेत्रों में पहुंचाने और फिर सीमावर्ती इलाकों में जमा कर बड़े वाहनों के माध्यम से पश्चिम बंगाल भेजे जाने की बात सामने आयी है.
डंपर रोककर कोयला उतारने की शिकायत
कोयला चोरी की बढ़ती शिकायतों ने कोयला परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. परिवहन से जुड़े लोगों के अनुसार, डंपरों को रोककर कोयला उतारने की घटनाओं के कारण वाहन निर्धारित समय पर रेलवे साइडिंग तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. इससे परिवहन चक्र प्रभावित होने के साथ कंपनी, ट्रांसपोर्टर और डंपर मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
गांव के नाम पर सक्रिय असामाजिक तत्वों का नेटवर्क!
कोयला चोरी से जुड़े मामले में यह बात सामने आ रही है कि कुछ असामाजिक तत्व ग्रामीणों के नाम का इस्तेमाल कर कोल लिंक रोड पर डंपरों को रोकते हैं. डंपर रुकने के बाद कोयला उतारकर छोटे वाहनों से अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाया जाता है. बाद में इस कोयले को एकत्र कर बड़े वाहनों से दूसरे राज्यों में भेजे जाने की शिकायत है.
इस तरह छोटे स्तर पर शुरू होने वाली कोयला चोरी धीरे-धीरे बड़े अवैध कारोबार का रूप लेती दिख रही है. यदि इस नेटवर्क की कड़ियों की जांच की जाए तो कोयला उतारने से लेकर उसे जमा करने और बड़े वाहनों के जरिये बाहर भेजने तक कई स्तरों पर लोगों की भूमिका सामने आ सकती है.
इन जगहों पर बढ़ी कोयला चोरी की शिकायतें
कोयला चोरी को लेकर तैयार क्षेत्रवार रिपोर्ट में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों के कई स्थानों को संवेदनशील बताया गया है. महेशपुर थाना क्षेत्र में पोखरिया हरिजन टोला, तसरिया/गायबथान, गोविंदपुर, पीपलजोरी, शहर ग्राम व धावाडंगाल, हिरनपुर थाना क्षेत्र में बन पोखरिया, सिलकुट्टी व मोहलान तथा मालपहाड़ी ओपी क्षेत्र में बरहाबाद शामिल हैं.
वहीं नगर थाना क्षेत्र में झरना मोड़, सिबतला, रामपुर मोड़, मटियापहाड़ी पॉलिटेक्निक बाईपास, कोलाजोरा, आसनदिप्पा बाईपास और दुर्गापुर मोड़ को कोयला चोरी के लिहाज से संवेदनशील बताया गया है. इन स्थानों पर बढ़ती घटनाओं से कोयला परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आयी है.
सरकारी राजस्व को भी लग रही चपत
कोयला चोरी का सबसे बड़ा असर सरकारी राजस्व पर पड़ता है. कोयले की निर्धारित मात्रा रेलवे साइडिंग तक नहीं पहुंचने से कंपनी को नुकसान होता है और अवैध रूप से बाहर भेजे जाने वाले कोयले के कारोबार से सरकार को मिलने वाले राजस्व की भी क्षति होती है. दूसरी ओर, ट्रांसपोर्टर और डंपर मालिकों को वाहन रोकने, समय की बर्बादी और निर्धारित ट्रिप प्रभावित होने से नुकसान उठाना पड़ता है.
पहले भी उठता रहा है मामला
पचुवाड़ा से पाकुड़ रेलवे साइडिंग तक कोयला परिवहन के दौरान चोरी की शिकायतों को लेकर जिले में पहले भी खबरें प्रकाशित होती रही हैं. इसके बावजूद संवेदनशील स्थानों पर कोयला चोरी की घटनाएं पूरी तरह बंद नहीं हुई हैं. वर्तमान में चिन्हित स्थानों पर घटनाओं में वृद्धि होने की सूचना है, जिससे कोयला ट्रांसपोर्टेशन का कार्य प्रभावित हो रहा है.
कंपनी और ट्रांसपोर्टरों का नुकसान
डीबीएल कोल कंपनी के एवीपी ब्रजेश कुमार ने कहा कि कोयला चोरी की घटनाओं से कंपनी के साथ ट्रांसपोर्टर और डंपर मालिकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. डंपरों को रास्ते में रोककर कोयला उतारने से वाहनों का परिचालन चक्र प्रभावित होता है और रेलवे साइडिंग तक निर्धारित समय पर कोयला पहुंचाने में बाधा आती है. इससे परिवहन की लागत और समय दोनों बढ़ते हैं.
उन्होंने कहा कि कोयला चोरी से सरकार को राजस्व का नुकसान होने के साथ कंपनी के उत्पादन एवं डिस्पैच लक्ष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. कोयला परिवहन को सुरक्षित और निर्बाध रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर प्रभावी निगरानी और आवश्यक कार्रवाई जरूरी है.
