ओके... बीड़ी बनाने वाली महिलाएं आज भी उपेक्षित

फोटो संख्या 2 – बीड़ी बांधती महिलाएं. संवाददाता, पाकुड़सदर प्रखंड की 25 से 30 हजार महिला मजदूर रोजाना बीड़ी बनाकर परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं. इस कार्य से इनका स्वास्थ्य तो प्रभावित होता ही है साथ ही पर्याप्त मेहनताना भी नहीं मिलता. लेकिन सलाना लाखों का मुनाफा दिलाने वाली इन बीड़ी मजदूरों की हालत […]

फोटो संख्या 2 – बीड़ी बांधती महिलाएं. संवाददाता, पाकुड़सदर प्रखंड की 25 से 30 हजार महिला मजदूर रोजाना बीड़ी बनाकर परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं. इस कार्य से इनका स्वास्थ्य तो प्रभावित होता ही है साथ ही पर्याप्त मेहनताना भी नहीं मिलता. लेकिन सलाना लाखों का मुनाफा दिलाने वाली इन बीड़ी मजदूरों की हालत में सुधार के लिए केंद्र व राज्य सरकार ने ध्यान नहीं दिया.शोषित हो रही महिलाएं: बीड़ी को बाजार तक पहुंचाने में छोटे व्यवसायियों व बिचौलियों का बहुत बड़ा हाथ होता है. ऐसे में ये मजदूर शोषित होने को विवश है. दूसरी ओर महिला मजदूरों को न तो स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा मिल पायी और न ही आवास. सरकार द्वारा बीड़ी आवास योजना भी चालू किया गया. लेकिन सभी पंजीकृत बीड़ी मजदूरों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है.बंद हो गया अस्पताल: इशाकपुर में खोले गये बीड़ी अस्पताल को भी बंद कर दिया गया है. दो माह से उसका लाभ मजदूरों व उनके परिजनों को नहीं मिला है. बीड़ी मजदूर ताहेरा बीबी, गुलसन बेवा, असमानारा, गुलनेर बेवा आदि ने बताया कि प्रशासन यदि सही तरीके से हमारी समस्याओं पर ध्यान देती तो हमें सारी सुविधाएं मिलती.

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