विवेक चंद्र, पाकुड़ : सरकार के सहयोग से बरमसिया (लिट्टीपाड़ा) की सूरजबेड़ा पंचायत में ग्रामीणों ने पत्थर और मिट्टी से चेकडैम बनाया है. बारिश में पहाड़ से आ रहे पानी को रोकने के लिए केवल चार लाख की लागत से 15 जगहों पर मिट्टी व पत्थर से चेकडैम बनाया गया.
मनरेगा के तहत किये गये इस कार्य से लगभग 48 एकड़ (20 हेक्टेयर) जमीन की सिंचाई हो रही है. कभी टांड़ कही जाने वाली इस जमीन पर अब रोपनी के बाद धान के पौधे लहलहा रहे हैं. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सीमेंट, लोहा और गिट्टी का इस्तेमाल कर बनाये जाने वाले चेकडैम की लागत औसतन 20 लाख रुपये तक होती है.
सिंचाई और अंडरग्राउंड वाटर की री-चार्जिंग साथ-साथ : लिट्टीपाड़ा के बीडीओ सत्यवीर रजक बताते हैं : पत्थर और मिट्टी पानी को जमीन के अंदर जाने से नहीं रोकते हैं. इससे खेतों की सिंचाई के साथ अंडरग्राउंड वाटर की री-चार्जिंग का काम भी हो रहा है. ग्रामीणों को उनके मन लायक काम के एवज में आमदनी भी हो रही है.
लाभुक हैं खुश : चेकडैम डैम से लाभुक बनी देवी पहाड़िन कहती है कि पहले पानी नहीं होने के कारण उनके खेतों में फसल नहीं लगायी जाती थी. चेकडैम बनने के बाद पहली बार खेतों में रोपनी की गयी है.
सोमरिया पहाड़िन बताती हैं कि सालों से गांवों में मिट्टी और पत्थर से चेकडैम बनाये जाते थे. लेकिन, इस बार सरकार ने मदद की है. गांव वालों को चेकडैम बनाने के लिए पत्थर दिया. साथ ही चेकडैम बनाने का काम करने वालों को मजदूरी भी दी है. चेकडैम से खेतों में पानी मिल रहा है. इस बार अच्छी फसल होगी.
ग्रामीणों ने बनायी योजना सरकार ने दिये पैसे
सूरजबेड़ा में पत्थर-मिट्टी से चेकडैम की योजना ग्रामीणों ने ही बनायी. ग्रामसभा में प्रस्ताव पर स्वीकृति के बाद योजना प्रखंड को भेजी गयी. डीसी की अनुमति से मनरेगा के तहत चार लाख की स्वीकृति मिली. फिर गांव वालों ने चेकडैम बनाया.
प्रखंड के कार्यक्रम पदाधिकारी टिंकल कुमार चौधरी कहते हैं कि सीएम के निर्देश पर ग्रामीणों से पूछ कर योजनाएं तैयार की जा रही हैं. इसका फायदा उन्हें मिल रहा है. सरकार कम लागत में बेहतर कार्य कर रही है.
