हेसापीढ़ी गांव की अनोखी बोरिंग: बिना बिजली-सोलर के 24 घंटे बहता है पानी

जहां गर्मी के मौसम में झारखंड के कई गांव पानी की किल्लत से जूझते हैं, वहीं किस्को प्रखंड के बेठहठ पंचायत स्थित हेसापीढ़ी गांव में एक बोरिंग से सालों भर बिना किसी बिजली या सोलर पंप के 24 घंटे पानी बहता रहता है.

फोटो इस तरह 24 घंटे गिरते रहता है बोरिंग से पानी किस्को. जहां गर्मी के मौसम में झारखंड के कई गांव पानी की किल्लत से जूझते हैं, वहीं किस्को प्रखंड के बेठहठ पंचायत स्थित हेसापीढ़ी गांव में एक बोरिंग से सालों भर बिना किसी बिजली या सोलर पंप के 24 घंटे पानी बहता रहता है. यह बोरिंग वर्ष 2023 में खुदाई के बाद से लगातार पानी दे रही है, और वह भी बिना किसी मशीन या मानवीय प्रयास के. यह बोरिंग जितवाहन पहान के खेत में स्थित है, और इसकी खासियत यह है कि इसमें से पानी अपने आप निकलता रहता है. ग्रामीणों के अनुसार, यहां से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बहकर नाले के रास्ते नदी में चला जाता है. जबकि इसी पंचायत के अन्य गांवों में गर्मी के मौसम में जलस्तर नीचे चला जाता है और कुएं, तालाब, झरने तक सूख जाते हैं. सिंचाई और पेयजल संकट का समाधान बन सकता है यह स्रोत ग्रामीण नमित उरांव, बिजेंद्र उरांव, बंसी उरांव और प्रेम शर्मा का कहना है कि यदि इस पानी को संग्रहित करने की व्यवस्था की जाये, तो यह क्षेत्र की सिंचाई और पेयजल समस्या का स्थायी समाधान बन सकता है. वर्तमान में गांव में केवल वर्षा आधारित खेती होती है, और गर्मी में डैम भी सूख जाता है, जिससे फसलें बर्बाद हो जाती हैं. ग्रामीणों का सुझाव है कि सरकार इस बहते पानी को रोककर तालाब, टंकी या जलाशय के माध्यम से संग्रहित करे. इससे न केवल हेसापीढ़ी गांव, बल्कि आसपास के गांवों जहां गर्मी में पीने योग्य पानी की भारी किल्लत होती है, को भी राहत मिल सकती है. सरकार से मांग ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग से मांग की है कि इस प्राकृतिक जल स्रोत का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर इसे संरक्षित और उपयोगी बनाया जाये. यदि यह पानी संरक्षित किया गया, तो यह क्षेत्रीय कृषि, पशुपालन और पेयजल आपूर्ति में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.

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By VIKASH NATH

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