किस्को़ पेशरार प्रखंड के केकरांग मोड़ से रोरद तक आरइओ विभाग द्वारा ढाई करोड़ रुपये की लागत से बनी सात किलोमीटर लंबी कालीकरण सड़क पांच साल में ही पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. ओम साईं मंगलमूर्ति कंस्ट्रक्शन द्वारा वर्ष 2020 में निर्मित यह सड़क अब जानलेवा गड्ढों में तब्दील हो गयी है, जिससे राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सड़क का डामर पूरी तरह उखड़ चुका है और नुकीले पत्थर बाहर निकल आये हैं, जिससे आये दिन दुपहिया और चारपहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं. ओनेगढ़ा नदी पर पुल नहीं होने से बढ़ी 10 किलोमीटर दूरी : ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ इस खस्ताहाल सड़क तक ही सीमित नहीं है. गांव से पेशरार प्रखंड मुख्यालय की दूरी महज पांच किलोमीटर है, लेकिन गांव के बगल से गुजरने वाली ओनेगढ़ा नदी पर आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका. इसके कारण ग्रामीणों को केकरांग-रोरद की इसी जर्जर सड़क के रास्ते 15 किलोमीटर का लंबा और कष्टदायक सफर तय करना पड़ता है. स्थानीय ग्रामीण मनोज कुमार महली और शंकर प्रजापति ने कहा कि मुख्यालय, बाजार और थाना नजदीक होने के बावजूद पुल नहीं होने से हमें 10 किलोमीटर अतिरिक्त घूमकर जाना पड़ता है. घटिया निर्माण से आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी : गर्मी में तो लोग जैसे-तैसे नदी पार कर लेते हैं, लेकिन बरसात में स्थिति बदतर हो जाती है. बीमार मरीजों को अस्पताल ले जाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. बबलू प्रजापति व अन्य ग्रामीणों ने कहा कि संवेदक द्वारा घटिया निर्माण कराने के कारण सड़क पांच साल भी नहीं टिक सकी. जिला प्रशासन को कई बार आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. थक-हारकर ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क की मरम्मत और पुल निर्माण की मांग जल्द पूरी नहीं हुई, तो वे प्रखंड कार्यालय का घेराव करेंगे. इधर, मामले में जेइ जितेंद्र पंडित ने बताया कि विभागीय आदेश मिलते ही सड़क का नया डीपीआर बनाकर भेजा जायेगा.
2.5 करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क पांच साल में ही कबाड़
2.5 करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क पांच साल में ही कबाड़
