मनरेगा कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से विकास की रफ्तार थमी

मनरेगा कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से विकास की रफ्तार थमी

कैरो़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा, जो गरीब मजदूरों के जीवनयापन का मुख्य आधार है, वर्तमान में कैरो प्रखंड में पूरी तरह ठप पड़ गयी है. अपनी मांगों को लेकर मनरेगा कर्मी 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं, जिसके कारण मनरेगा कार्यालय में ताला लटक रहा है. इस हड़ताल में बीपीओ, रोजगार सेवक, कंप्यूटर ऑपरेटर और कनीय अभियंता शामिल हैं. रीढ़ टूटी तो थम गये जनकल्याणकारी कार्य : मनरेगा कर्मियों को योजना की ””””रीढ़ की हड्डी”””” माना जाता है. कर्मियों के आंदोलन पर जाने से प्रखंड में विकास कार्य अधर में लटक गये हैं. बीपीओ अरविंद कुमार ने बताया कि कर्मियों को पिछले सात महीने से मानदेय नहीं मिला है, वहीं मजदूरों को दिसंबर माह से उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है. भुगतान नहीं होने का यह दोहरा दर्द अब आक्रोश बनकर फूट रहा है. कर्मियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, हड़ताल जारी रहेगी. मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट : हड़ताल के कारण 125 दिनों के रोजगार की गारंटी वाली यह योजना कागजों तक सिमट गयी है. फील्ड कर्मियों और ऑपरेटरों की अनुपस्थिति में मस्टर रोल से लेकर जियो-टैगिंग तक के कार्य बाधित हैं. काम बंद होने से मनरेगा मजदूर खाली हाथ बैठे हैं, जिससे उनके समक्ष आर्थिक संकट गहरा गया है. बिना कनीय अभियंता और फील्ड स्टाफ के विकास की कल्पना अधूरी साबित हो रही है.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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