निर्विरोध चुना जाना महज संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति

निर्विरोध चुना जाना महज संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति

लोहरदगा़ एकीकृत बिहार-झारखंड की सबसे पुरानी नगर पालिकाओं में शुमार लोहरदगा नगर परिषद के उपाध्यक्ष की कुर्सी पर वार्ड संख्या 12 के पार्षद अब्दुल कादिर का कब्जा हो गया है. मंगलवार को समाहरणालय के सभाकक्ष में निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान वे निर्विरोध उपाध्यक्ष चुने गये. कादिर भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में उतरे हैं. उन्होंने वार्ड चुनाव में अंजुमन इस्लामिया के वर्तमान सदर और निवर्तमान उपाध्यक्ष रऊफ अंसारी को भारी मतों से पराजित किया था. पहले ही तय थी जीत की पटकथा : अब्दुल कादिर का निर्विरोध चुना जाना महज एक संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति का परिणाम था. चुनाव से पूर्व ही अधिकांश पार्षदों को ””””गोलबंद”””” कर लिया गया था. चर्चा है कि पार्षदों को भ्रमण पर भी ले जाया गया था, जहां ””””विशेष प्रबंधन”””” के बीच आम सहमति बनायी गयी. नतीजतन, समाहरणालय में किसी भी अन्य पार्षद ने नामांकन का साहस नहीं दिखाया. अधिकारी इंतजार करते रहे और अंततः एकल नामांकन के आधार पर कादिर के नाम की घोषणा कर दी गयी. नैतिकता पीछे, राजनीति आगे : वार्ड पार्षद चुनाव के वक्त जनसेवा, ईमानदारी और नैतिकता के जो दावे किये जा रहे थे, वे उपाध्यक्ष की कुर्सी के खेल में हवा के झोंके की तरह गायब दिखे. पार्षदों ने वही राह पकड़ी, जो परंपरागत राजनीति का हिस्सा रही है. कादिर के बड़े भाई हाजी अब्दुल जब्बारुल अंजुमन इस्लामिया के नाजिम-ए-आला हैं, जिसका लाभ भी उन्हें मिला. जीत के बाद समर्थकों ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया और बधाई देने वालों का तांता लगा रहा.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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