कुड़ू से अमित कुमार राज की रिपोर्ट
Emotional Raksha Bandhan Story : भाई बहन के रक्षा और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन को लेकर प्रखंड की बहनों में काफी उत्साह देखा जा रहा है. लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड में एक ऐसी ही बहन है जिसने भाई के लिए अपना एक किडनी दान करते हुए भाई को नया जीवन दान दिया तो भाई ने बहन के इस दान को जीवन भर ना चुकाने को वादा किया. बताया जाता है कि कुड़ू निवासी शिवानंद प्रसाद की शादी ऊषा साहू के साथ साल 2000 में हुईं थीं.
भाई के लिए बहन बनी जीवनदाता
ऊषा साहू का एक भाई और दो बहन है. इसी बीच साल 2016 में भाई रोहित साहू को किडनी फेल होने की जानकारी परिजनों को मिली. रांची रिम्स के चिकित्सको ने रोहित साहू को दिल्ली एम्स ले जाने का सलाह दिया. परिजन रोहित को लेकर दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल पहुंचे. जांच के बाद चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि रोहित साहू का किडनी फेल हो गया है और एक सप्ताह के भीतर किड़नी ट्रांसप्लांट नहीं किया गया तो रोहित को बचाना काफी मुश्किल होगा. काफी जगह किडनी के लिए प्रयास किया गया लेकिन सभी स्थानों पर निराशा हाथ लगी. इसी बीच रोहित साहू की बहन उषा साहू ने अपने पति से कुड़ू निवासी शिवानंद प्रसाद से बात किया तथा भाई के लिए एक किडनी दान करने की बात कही.
ये भी पढ़ें: झारखंड में फिर बदला मौसम का मिजाज, 30 अगस्त तक बारिश, इन जिलों में येलो अलर्ट
बहन ने भाई को किडनी देकर कायम की मिसाल
पति शिवानंद प्रसाद ने भाई के प्रति बहन के त्याग की भावना को देखते हुए शिवानंद प्रसाद ने इंकार नहीं किया . फिर क्या था ऊषा साहू अपने पति शिवानंद प्रसाद के साथ 10 मई 2016 को सर गंगाराम अस्पताल दिल्ली पहुंची तथा चिकित्सको को एक किडनी अपने भाई के लिए दान करने की इच्छा जाहिर किया. सभी तरह के जांच के बाद 16 मई 2016 को ऊषा साहू ने अपने भाई के लिए एक किडनी दान करते हुए भाई - बहन के पवित्र रिश्ते की मिसाल कायम किया.
भाई बोला- बहन का एहसान नहीं भूलूंगा
बहन उषा साहू के एक किडनी दान देने के बाद रोहित साहू को एक नया जीवन दान मिला. आज भी भाई रोहित साहू अपनी बहन के कर्ज को उतार नहीं सका है. ऊषा साहू ने बताया कि हम चार भाई बहनों में तीन बहन तथा एकमात्र भाई रोहित साहू है. भाई के लिए किडनी दान देकर काफी खुशी महसूस हो रही है. दूसरी तरफ लोहरदगा निवासी भाई रोहित साहू ने बताया कि बहन उषा साहू के इस कर्ज का एहसान जीवन भर नहीं चुका सकता हूं. आज जो जीवन मैं जी रहा हूं वह बहन उषा साहू की देन है.
ये भी पढ़ें: लेटलतीफी-टेंडर की पेचीदगी में अटकी सोना-सोबरन योजना, एक साल पुराना बैकलॉग बरकरार; 11 लाख लाभुक अब भी वंचित
