श्रवण बने नेशनल मास्टर कोच सह रेफरी

झारखंड सिलंबम एसोसिएशन के सह सचिव श्रवण साहू और उनकी पुत्री ऐश्वर्या साहू दोनों ने हिस्सा लिया.

लोहरदगा. लोहरदगा के बीआइडी निवासी श्रवण साहू और उनकी पुत्री ऐश्वर्या साहू ने सिलंबम मार्शल आर्ट में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर न सिर्फ लोहरदगा बल्कि पूरे झारखंड राज्य का मान बढ़ाया है. ऑल इंडिया सिलंबम फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में विगत 29 मई से 02 जून तक कन्याकुमारी के सीएसआइ. ऑडिटोरियम, कन्याकुमारी, तमिलनाडु में एक सिलंबम मास्टर ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया गया था. इस शिविर में लोहरदगा जिला से लोहरदगा जिला सिलंबम एसोसिएशन के सचिव सह झारखंड सिलंबम एसोसिएशन के सह सचिव श्रवण साहू और उनकी पुत्री ऐश्वर्या साहू दोनों ने हिस्सा लिया. ग्रैंडमास्टर सिलवा राज और उनके सहयोगी प्रशिक्षकों द्वारा दोनों पिता-पुत्री को बेसिक से एडवांस मास्टर लेवल तक का प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण के बाद ली गयी परीक्षा में दोनों को मास्टर की उपाधि से नवाजा गया, जो उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है. इसके अतिरिक्त, दो जून को एक रेफरी सेमिनार और परीक्षा का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रवण साहू के अलावा झारखंड से तीन अन्य – झारखंड सिलंबम एसोसिएशन के सचिव विनीत कुमार यादव, कोषाध्यक्ष प्रकाश रविदास और दिव्या कुमारी ने भाग लिया. इस परीक्षा में लिखित, मौखिक और प्रैक्टिकल टेस्ट शामिल थे. श्रवण साहू ने सर्वाधिक अंकों के साथ रेफरी के लिए उत्तीर्ण होकर झारखंड सिलंबम के चार आधिकारिक रेफरी में से एक बनने का गौरव प्राप्त किया.श्रवण साहू का कहना है कि यह खेल रामनवमी और मुहर्रम जैसे अवसरों पर खेले जाने वाले पारंपरिक लाठी-काठी के समान है. यदि इसे व्यवस्थित तरीके से खेला जाए, तो सिलंबम में पदक जीतना और अपना भविष्य बनाना बहुत आसान है. श्रवण साहू और ऐश्वर्या साहू की इस शानदार उपलब्धि पर लोहरदगा जिला सिलंबम एसोसिएशन के संरक्षिका सुषमा सिंह, अध्यक्ष लखन राम, उपाध्यक्ष कयूम खान, कोषाध्यक्ष दसई उरांव और जिले के सभी खेल प्रेमियों ने हार्दिक बधाई दी है। यह उपलब्धि निश्चित रूप से लोहरदगा और झारखंड के युवाओं को सिलंबम जैसे प्राचीन और मान्यता प्राप्त खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित करेगी। सिलंबम: एक प्राचीन मार्शल आर्ट का पुनरुत्थान उल्लेखनीय है कि सिलंबम एक प्राचीन मार्शल आर्ट है, जो 5000 साल से भी अधिक समय से प्रचलित है. यह कला अब विश्व के 22 देशों में खेली जाती है, जिनमें श्रीलंका, वियतनाम, यूएसए, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देश शामिल हैं. भारत में, इसे मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स (भारत सरकार), स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) और खेलो इंडिया से मान्यता प्राप्त है.

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By ANUJ SINGH

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