लोहरदगा़ कभी परिवार का पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर राजेश उरांव आज अपने क्षेत्र में पशु डॉक्टर के नाम से पहचाने जाते हैं. लोहरदगा प्रखंड के भटखीजरी गांव निवासी राजेश की यह कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की अनोखी मिसाल है, जो ग्रामीण युवाओं को प्रेरित कर रही है. मैट्रिक पास राजेश की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी, जिसके कारण उन्हें हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मजदूरी करनी पड़ी. परिवार से दूर कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए भी उनके मन में हमेशा अपने गांव लौटकर सम्मानजनक काम करने की इच्छा थी. आरसेटी के प्रशिक्षण से बदली जिंदगी : इसी दौरान राजेश को बैंक ऑफ इंडिया ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) लोहरदगा के पशु मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी मिली. उन्होंने इस कोर्स में भाग लेकर पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, कृमिनाशन, पोषण प्रबंधन और रोगों की पहचान व रोकथाम की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की. पशुपालकों के बीच गहरा विश्वास : प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने क्षेत्र में पशु मित्र के रूप में सेवा शुरू की. धीरे-धीरे अपनी कार्यकुशलता के बल पर उन्होंने पशुपालकों के बीच गहरा विश्वास बना लिया. अब वे गांव-गांव जाकर पशुओं का इलाज करते हैं और लोगों को सही देखभाल के प्रति जागरूक भी करते हैं. अब हर महीने कमा रहे 40 हजार रुपये : राजेश उरांव आज इस कार्य से हर महीने लगभग 40 हजार रुपये की सम्मानजनक आय अर्जित कर रहे हैं. जो व्यक्ति कभी आजीविका के लिए भटक रहा था, आज वह अपने ही गांव में स्वावलंबन के साथ कई पशुपालक परिवारों का सहारा बना हुआ है. ग्रामीण युवाओं के लिए बने प्रेरणा : राजेश का कहना है कि सही मार्गदर्शन और कौशल प्रशिक्षण मिले तो गांव के युवा भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं. उनकी यह सफलता साबित करती है कि लगन से किसी भी परिस्थिति को बदला जा सकता है. आज राजेश ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा और आत्मनिर्भर भारत की सच्ची मिसाल बन चुके हैं.
पलायन छोड़ पशु डॉक्टर बने राजेश, पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल
पलायन छोड़ पशु डॉक्टर बने राजेश, पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल
