लोहरदगा. झारखंड आंदोलनकारी समुदाय के कार्यकारी अध्यक्ष अमर किन्डो की अध्यक्षता में हुई. मौके पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय अध्यक्ष राजू महतो के निर्देशानुसार शीघ्र ही झारखंड के सभी सांसद, विधायक व मंत्रियों से मिलकर 11 सूत्री मांग पत्र सौंपा जायेगा. साथ ही मुख्यमंत्री से वार्ता कराने के लिए आग्रह किया जायेगा, ताकि आंदोलनकारियों की मांगों और समस्याओं का सामाधन हो सके. कहा कि राज्य निर्माताओं की पहचान सम्मान एवं व्यवस्थाओं का लाभ देने में सरकार अभी भी विफलैैैैैैैैैैै है. आंदोलनकारियों ने झारखंड सरकार को कई बार 11 सूत्री मांग पत्र दिया है, जिस पर सरकार ने कोई काोर्रवाई नहीं की है. जनप्रतिनिधियों ने इस पर संज्ञान में लेते हुए जल्द वार्ता कराएंगे, अन्यथा झारखंड सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन होगा. सचिव विशेषण भगत ने कहा कि हमारे शहीदों एवं पूर्वजों और पुरखों ने झारखण्ड की पहचान एवं झारखण्ड की आदिवासी, मूलवासी समुदाय के अधिकारों के लिये लगातार संघर्ष करते रहे हैं. लंबे संघर्ष के बाद राज्य का गठन हुआ. जिसके बुनियाद में जल-जंगल-जमीन, भाषा, संस्कृति, परंपरा व महान जीवन प्रणाली की रक्षा अर्न्तनिहित थी. एकजुट होकर झारखण्डी पहचान एवं अस्तित्व के खिलाफ रची जा रही राजिश को नाकाम करने की जरूरत है. कार्यक्रम को बिहारी भगत, बालोमनी बाखला, सुखदेव उरांव आदि संबोधित किया. बैठक में मनोज उराँव, रामधनी भगत, जगदीश उरांव, सूरज मोहन लकड़ा, प्रमेश्वर उरांव, शुशिला लकड़ा, गंगा उराँव, उषा रानी लकड़ा, लक्ष्मी देवी, तारा मिंज आदि समेत बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद थे.
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