20 रुपये का टिकट, 50 रुपये टेंपो भाड़ा, रेलवे की अव्यवस्था से यात्री परेशान

कोयल नदी पर बने रेलवे पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद रांची–लोहरदगा–टोरी मेमू ट्रेन फिलहाल ईरगांव स्टेशन तक ही संचालित हो रही है.

By VIKASH NATH | January 13, 2026 7:56 PM

गोपी कुंवर, लोहरदगा कोयल नदी पर बने रेलवे पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद रांची–लोहरदगा–टोरी मेमू ट्रेन फिलहाल ईरगांव स्टेशन तक ही संचालित हो रही है. ऐसे में यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है. रांची से यात्री 20 रुपये में लोहरदगा का टिकट लेते हैं, लेकिन ट्रेन उन्हें लोहरदगा के बजाय ईरगांव स्टेशन पर उतार देती है. इसके बाद ईरगांव से लोहरदगा पहुंचने के लिए टेंपो का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें प्रति यात्री 50 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं. यात्रियों का कहना है कि रेलवे उनके साथ धोखा कर रही है. रेलवे की ओर से दावा किया जा रहा है कि ईरगांव से लोहरदगा रेलवे स्टेशन तक मुफ्त बस सेवा उपलब्ध करायी गयी है. लेकिन हकीकत यह है कि प्रत्येक फेरे में करीब डेढ़ से दो हजार यात्री ईरगांव हाल्ट पहुंच रहे हैं, जिनमें लगभग 1200 नियमित यात्री होते हैं. इसके मुकाबले रेलवे ने सिर्फ दो बसों की व्यवस्था की है. एक बस में 52 यात्रियों के बैठने की क्षमता है. दोनों बसों में मिलाकर किसी तरह 125 यात्रियों को एडजस्ट किया जा रहा है. शेष यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. दो बसों की यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है. मजबूरी में अधिकांश यात्रियों को टेंपो या अन्य साधनों से लोहरदगा जाना पड़ रहा है. जबकि टिकट लोहरदगा तक का काटा जा रहा है और किराया भी पूरा लिया जा रहा है. इस स्थिति से यात्री खासे नाराज हैं. महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, क्योंकि बस में चढ़ने के लिए मारामारी होती है और पहले टीटी को टिकट भी दिखाना पड़ता है. एमएसटी यात्रियों की भी बढ़ी परेशानी लोहरदगा से रांची के लिए करीब 300 लोगों ने एमएसटी बनवा रखा है, जो नियमित रूप से आना-जाना करते हैं. यदि एमएसटी यात्रियों को भी जोड़ा जाए, तो दो बसों से उन्हें लोहरदगा पहुंचाना नामुमकिन है. यात्रियों का कहना है कि या तो बसों की संख्या बढ़ाई जाए या फिर टिकट ईरगांव तक का ही जारी किया जाए, ताकि भ्रम की स्थिति न बने. खराब सड़क बनी अतिरिक्त मुसीबत ईरगांव से लोहरदगा तक सड़क निर्माण का कार्य जारी है. रास्ते में दो जगह डायवर्सन हैं. नाली निर्माण के लिए जगह-जगह गड्ढे खोदे गये हैं, जो हर पल दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं. ऐसे में टेंपो और अन्य साधनों से सफर करना भी जोखिम भरा हो गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है