खेतों में पराली जलाने से चारे का संकट

खेतों में पराली जलाने से चारे का संकट

किस्को़ प्रखंड के बेठहठ, पाखर और नवाडीह सहित कई पंचायतों में इन दिनों खेतों में रखी पराली (पुआल) में आग लगाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. असामाजिक तत्वों या लापरवाही के कारण लग रही इस आग से सैकड़ों एकड़ में फैला चारा जलकर राख हो रहा है, जिससे बेजुबान मवेशियों के समक्ष गंभीर खाद्य संकट उत्पन्न हो गया है. मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को नुकसान : ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में पुआल जलाने से न केवल चारे का नुकसान हो रहा है, बल्कि इससे निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को खतरनाक स्तर तक बढ़ा रहा है. आग के कारण जमीन के मित्र कीट मर रहे हैं, जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है. कई बार हवा के झोंकों से यह आग आसपास की खड़ी फसलों तक भी पहुंच जाती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है. प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग : मवेशी चारे के अभाव में इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं. किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खेतों में पुआल जलाने वाले लोगों को चिह्नित कर उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाये. किसानों का कहना है कि इस कुप्रथा पर रोक लगाना जरूरी है ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे और मवेशियों को आसानी से घास-फूस उपलब्ध हो सके. आग की इन घटनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोष व्याप्त है.

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