भंडरा़ सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण और वेतन समानता की मांग को लेकर मनरेगा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के 96 दिन पूरे हो चुके हैं. मनरेगा कर्मचारी संघ के बैनर तले जारी इस आंदोलन के कारण प्रखंड में पंचायत स्तर पर विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गये हैं. मस्टर रोल, तकनीकी स्वीकृति और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं बाधित होने से फाइलों में धूल फांक रही है. इस गतिरोध का सबसे बुरा असर आबुआ आवास, दीदी बाड़ी, बिरसा सिंचाई कूप, बागवानी और जल संरक्षण जैसी फ्लैगशिप योजनाओं पर पड़ा है. प्रखंड में 10,847 सक्रिय पंजीकृत मजदूरों में से मौजूदा समय में महज 845 को ही काम मिल पा रहा है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में मई तक 1,34,973 मानव दिवस सृजन का लक्ष्य था, जिसके मुकाबले अब तक केवल 39,663 मानव दिवस ही सृजित हो सके हैं, जो लक्ष्य का 30% भी नहीं है. रोजगार संकट के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है. कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट के समक्ष जोरदार प्रदर्शन भी किया. संघ का आरोप है कि वर्षों से अल्प मानदेय और असुरक्षित सेवा शर्तों के बीच काम कराने के बावजूद सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं कर रही है. अब ग्रामीणों और मजदूरों की निगाहें सरकार व आंदोलनरत कर्मियों के बीच होने वाले किसी समाधान पर टिकी है.
मनरेगा कर्मियों की हड़ताल के 96 दिन पूरे, विकास कार्य ठप, लक्ष्य से पिछड़े
मनरेगा कर्मियों की हड़ताल के 96 दिन पूरे, विकास कार्य ठप, लक्ष्य से पिछड़े
