Lohardaga News: कभी खिलाड़ियों से गुलजार था ललित नारायण स्टेडियम, अब गेट-ग्रिल तक चोरी और मैदान में चर रहे पशु

लोहरदगा का ललित नारायण स्टेडियम सुविधाओं के अभाव में बदहाल है। मैदान में घास और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटका है।

लोहरदगा : खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा और संसाधन उपलब्ध कराने वाला शहर का प्रमुख ललित नारायण स्टेडियम खुद बदहाली का शिकार है. कभी खेल गतिविधियों और प्रतियोगिताओं से गुलजार रहने वाला यह स्टेडियम आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है. स्टेडियम के गेट और ग्रिल तक चोरी हो चुके हैं. मैदान में बड़ी-बड़ी घास उग आयी है. परिसर में नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है. इससे खिलाड़ियों और आम लोगों को परेशानी होती है.

बताया जाता है कि लाखों रुपये खर्च कर स्टेडियम का जीर्णोद्धार कराया गया था, लेकिन बाद में इसमें अनियमितता का मामला सामने आया था. मामले में कुछ लोगों को जेल भी भेजा गया था. इसके बाद से स्टेडियम की स्थिति लगातार खराब होती चली गयी. वर्तमान में स्टेडियम अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है.

खिलाड़ियों को अभ्यास में हो रही परेशानी

स्टेडियम की स्थिति देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि खेल और खिलाड़ियों को लेकर जिम्मेदार विभाग कितना गंभीर है. नियमित रखरखाव और साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं होने से स्टेडियम की स्थिति लगातार खराब हो रही है. मैदान और परिसर की समुचित देखरेख नहीं होने के कारण खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

खेल मैदान में जरूरी सुविधाओं के अभाव में स्थानीय खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए अपेक्षित माहौल नहीं मिल पा रहा है. खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ नियमित साफ-सफाई और रखरखाव जरूरी है.

कभी दूसरे राज्यों से आते थे खिलाड़ी, अब बना पशुओं का चरागाह

फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स समेत अन्य खेलों के खिलाड़ियों के लिए यह मैदान कभी महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था. स्टेडियम में एथलेटिक्स की प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती थीं, जिनमें कई राज्यों से खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंचते थे. लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी और रखरखाव के अभाव में खिलाड़ियों का उत्साह प्रभावित हो रहा है.

अब स्थिति यह है कि मैदान में पशु चरते नजर आते हैं. इससे मैदान की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम की स्थिति में सुधार कर इसे फिर से खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी क्षमता निखारने का बेहतर अवसर मिल सके.

बदहाली दूर हो, तो निखरेंगी खेल प्रतिभाएं

खिलाड़ियों का कहना है कि यदि ललित नारायण स्टेडियम की मरम्मत कराकर नियमित रखरखाव किया जाये और खेल के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएं, तो लोहरदगा से राज्य और राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी निकल सकते हैं.

स्थानीय खेल प्रेमियों ने प्रशासन और खेल विभाग से स्टेडियम की समग्र स्थिति की जांच कराने तथा आवश्यक मरम्मत, साफ-सफाई, मैदान के समुचित रखरखाव और खिलाड़ियों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जिस स्टेडियम से जिले के खिलाड़ियों का भविष्य जुड़ा है, उसे बदहाली में छोड़ना खेल प्रतिभाओं के साथ अन्याय है. खेल प्रेमियों ने सवाल उठाया कि सरकार जब खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और खेलों को प्रोत्साहित करने की बात करती है, तो लोहरदगा का प्रमुख स्टेडियम अपनी बदहाली से कब बाहर निकलेगा.

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लेखक के बारे में

By गोपी कृष्ण

गोपी कृष्ण वर्तमान में ब्यूरो प्रमुख हैं. समाज में व्याप्त समस्याओं, भ्रष्टाचार, अंधविश्वास, महिला उत्पीड़न, पलायन को लेकर काम में रूचि है. बहुत काम किया है.

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