कुड़ू से अमित कुमार राज की रिपोर्ट
Lohardaga News: कुड़ू में वर्षों तक प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद जब जर्जर सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो ग्रामीणों ने खुद ही जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया. रविवार को लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड की लावागाई पंचायत के ग्रामीण हाथों में फावड़ा, कुदाल, टोकरी और कड़ाही लेकर सड़क पर उतर गए. सामूहिक श्रमदान के जरिए ग्रामीणों ने करीब दो किलोमीटर लंबी जर्जर कच्ची सड़क की मरम्मत कर उसे आवागमन लायक बना दिया.
लावागाई से आधा दर्जन गांवों को जोड़ती है सड़क
यह सड़क लावागाई से लोहरदगा सदर प्रखंड के ऐने, बाघा, नदीनगड़ा, रामपुर, बख्शी, नगड़ा समेत आधा दर्जन गांवों को जोड़ती है. लंबे समय से सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी थी. बरसात के दिनों में इस रास्ते से गुजरना लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था. बाइक और छोटे वाहनों का चलना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था.
कई बार की गई शिकायत, लेकिन नहीं हुई सुनवाई
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत को लेकर कई बार प्रखंड प्रशासन, जिला प्रशासन, स्थानीय विधायक और सांसद को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया गया. इसके बावजूद सड़क की मरम्मत की दिशा में कोई पहल नहीं हुई. आखिरकार ग्रामीणों ने बैठक कर श्रमदान से सड़क बनाने का निर्णय लिया.
स्कूल संचालक ने उपलब्ध कराया मोरम और डस्ट
सड़क मरम्मत के लिए आवश्यक मोरम और डस्ट की व्यवस्था बिरसा ग्लोबल स्कूल के संचालक संजय कुमार साहू ने कराई. बताया गया कि पिछले दो दिनों में करीब 50 ट्रैक्टर मोरम और डस्ट सड़क पर गिराया गया. रविवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रमदान के लिए जुटे और कुछ ही घंटों में करीब दो किलोमीटर सड़क को समतल कर आवागमन योग्य बना दिया.
किसानों और छात्रों को मिली राहत
इस सड़क से आसपास के गांवों के किसान अपनी उपज कुड़ू और लोहरदगा बाजार तक पहुंचाते हैं. वहीं, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इसी मार्ग से कुड़ू और लोहरदगा के स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई के लिए आते-जाते हैं. सड़क की बदहाल स्थिति के कारण ग्रामीणों को लंबे समय से परेशानी झेलनी पड़ रही थी.
ग्रामीण बोले- मजबूरी में उठाना पड़ा यह कदम
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क का निर्माण वर्षों पहले ग्रामीण सड़क योजना के तहत हुआ था, लेकिन रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई. कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मरम्मत की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. ऐसे में मजबूर होकर गांव के लोगों ने श्रमदान के जरिए सड़क को फिर से चलने लायक बनाया. श्रमदान अभियान में बिरसा ग्लोबल स्कूल के संचालक संजय कुमार साहू, रंजीत उरांव, अशोक उरांव, सुखदेव उरांव, बिराज उरांव, सोमनाथ उरांव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और विभिन्न विद्यालयों के छात्र शामिल हुए. ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अब प्रशासन इस सड़क के स्थायी निर्माण की दिशा में गंभीर पहल करेगा.
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