किस्को़ प्रखंड की खरकी पंचायत के कोचा गांव की पहाड़ियों की तलहटी में बसे ऊपर कोचा, बरनाग, करम टोली और बांध टोली के ग्रामीण आज भी विकास की राह देख रहे हैं. मुंडा, नगेसिया, उरांव, लोहार और तुरी समुदाय बहुल इन टोलों में न तो सड़क है और न ही पेयजल व स्वास्थ्य की सुविधा. उबड़-खाबड़ रास्तों और टूटे पुलों के कारण बरसात में आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है. ग्रामीण सोहबइत मुंडा, संगीता व मुक्ति लकड़ा ने बताया कि चुनाव के समय वोट मांगने आने वाले जनप्रतिनिधि जीत के बाद दोबारा सुध नहीं लेते. तीन बार मुखिया चुनने के बावजूद किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. प्रशासनिक अधिकारी भी आज तक इन टोलों में नहीं पहुंचे हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है. माइंस के लाल पानी और पलायन का दंश झेल रहे लोग : गांव में रोजगार का अभाव होने के कारण अधिकांश आबादी पलायन कर चुकी है, जबकि बचे हुए लोग जंगल की सूखी लकड़ियां बेचकर जीविकोपार्जन कर रहे हैं. पेयजल संकट ऐसा है कि लोग नदी का दूषित पानी पीने को विवश हैं, जिसमें बॉक्साइट माइंस के कारण लाल पानी बहता है. ग्रामीण जगदेव लोहरा, सोमा नगेसिया और कुंवर तुरी ने बताया कि पहाड़ी नदी में पुल नहीं होने से बरसात में पानी बढ़ने पर लोग हफ्तों गांव में ही कैद रहते हैं, जिससे खाने-पीने का संकट खड़ा हो जाता है. मरीजों को अस्पताल ले जाना आफत : जर्जर और संकीर्ण रास्तों के कारण मरीजों को किस्को अस्पताल ले जाना आफत साबित होता है. बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अभिभावक बरसात में उन्हें स्कूल भी नहीं भेज पाते. बांध टोली से करम टोली और ऊपर कोचा जाने वाली मुख्य सड़क कटाव के कारण बेहद खतरनाक हो चुकी है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इन सुदूर टोलों में जल्द से जल्द बुनियादी सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है.
कोचा गांव के चार टोले आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम
कोचा गांव के चार टोले आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम
