लोहरदगा में भगवान भरोसे अग्नि सुरक्षा, होटल, नर्सिंग होम और बैंक्वेट हॉल में नहीं हैं पुख्ता इंतजाम

लोहरदगा में भगवान भरोसे अग्नि सुरक्षा, होटल, नर्सिंग होम और बैंक्वेट हॉल में नहीं हैं पुख्ता इंतजाम

लोहरदगा़ शहर में तेजी से बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के बीच अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. कई बड़े होटल, बैंक्वेट हॉल, नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों में आग से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) या तो गायब हैं, या फिर वर्षों से उनका रिफिलिंग और नवीनीकरण नहीं कराया गया है. तेजी से बन रहे बहुमंजिला भवनों में भी आपातकालीन निकास द्वार (इमरजेंसी एग्जिट), फायर अलार्म और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं की जा रही है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अनाप-शनाप किराया वसूलने वाले प्रतिष्ठानों में फायर अलार्म और एग्जिट गेट तक नहीं है़ लोगों ने कहा कि किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति में यहां जान-माल की भारी क्षति हो सकती है. भीड़ वाले स्थानों पर भारी लापरवाही : शहर में संचालित अधिकांश होटलों और मैरिज हॉलों में शादी-विवाह व अन्य आयोजनों के दौरान भारी भीड़ उमड़ती है. इन प्रतिष्ठानों द्वारा ग्राहकों से मोटा किराया तो वसूला जाता है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर एक-दो स्थानों को छोड़कर कहीं भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं. यही स्थिति निजी नर्सिंग होम की भी है, जहां गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं. झारखंड में फायर एनओसी को लेकर कड़े नियम होने के बावजूद इनके अनुपालन की लगातार अनदेखी की जा रही है. जागरूक शहरवासियों ने जिला प्रशासन से सभी व्यावसायिक भवनों का अविलंब अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराने और दोषी संचालकों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है. जांच कर करेंगे कार्रवाई : प्रभारी अधिकारी : लोहरदगा के प्रभारी अग्निशमन पदाधिकारी रामाधार मुंडा ने बताया कि मैं यहां नया आया हूं. जानकारी के मुताबिक, अधिकांश प्रतिष्ठानों में अग्निशमन उपकरण नहीं लगे हैं, जो कि कानूनी रूप से अनिवार्य है. विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाता है, फिर भी लोग गंभीर नहीं हैं. जल्द ही विशेष जांच अभियान चलाकर उपकरण नहीं लगाने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी. सिर्फ चार कर्मियों के भरोसे जिला, पद खाली : जिले में अग्निशमन विभाग खुद संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है. यहां स्थायी अग्निशमन पदाधिकारी का पद लंबे समय से खाली है और यह प्रभार के सहारे चल रहा है. विभाग में कुल 14 स्वीकृत पद हैं, जिनके मुकाबले मात्र चार कर्मी ही कार्यरत हैं. ऐसे में किसी बड़े हादसे की स्थिति में विभाग की तैयारियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होना स्वाभाविक है.

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