लोहरदगा की चीरी पंचायत में हाथियों ने उजाड़े घर, अनाज चट, ग्रामीणों में दहशत

Lohardaga News: लोहरदगा के कुड़ू प्रखंड में जंगली हाथियों के झुंड ने चीरी और सुंदरू पंचायत में तीन मकानों को क्षतिग्रस्त कर अनाज नष्ट कर दिया. ग्रामीणों ने भागकर जान बचाई. वन विभाग से मुआवजा और हाथियों को सुरक्षित कॉरिडोर में भेजने की मांग की गई है.

कुड़ू से अमित कुमार राज की रिपोर्ट

Lohardaga News: झारखंड के लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड में एक माह बाद फिर जंगली हाथियों के झुंड ने ग्रामीणों के बीच दहशत फैला दी. मंगलवार देर रात हाथियों का दल चीरी पंचायत के बड़का टोली गांव और सुंदरू पंचायत के सुकुमार गांव पहुंचा, जहां तीन मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया. हाथियों ने घरों में रखा धान, चावल और अन्य खाद्यान्न खा लिया तथा काफी सामान नष्ट कर दिया. हालांकि घरों में मौजूद लोगों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचा ली. घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है और वन विभाग से मुआवजे की मांग की गई है.

एक माह बाद फिर गांव में पहुंचा हाथियों का झुंड

स्थानीय लोगों के अनुसार हाथियों का झुंड कैरो प्रखंड की ओर से होते हुए कड़ाक क्षेत्र पार कर चीरी जंगल पहुंचा. मंगलवार शाम जंगल से निकलकर हाथियों ने चीरी पंचायत के बड़का टोली गांव का रुख किया. रात करीब दस बजे गांव में प्रवेश करते ही हाथियों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया. उस समय अधिकांश ग्रामीण भोजन करने के बाद अपने घरों में सो रहे थे. अचानक हाथियों के पहुंचने से पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई.

शनिया और पारसनाथ उरांव के मकान को नुकसान

हाथियों ने सबसे पहले शनिया उरांव के कच्चे मकान को निशाना बनाया. झुंड ने मकान की दीवार और छप्पर तोड़ दिए तथा घर के अंदर रखा धान, चावल और अन्य राशन खा लिया. कई खाद्यान्न सामग्री को भी नुकसान पहुंचाया. हाथियों की आवाज सुनकर शनिया उरांव और उनके परिवार की नींद खुली. किसी तरह पति-पत्नी घर से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे और अपनी जान बचाई. ग्रामीणों ने शोर मचाकर हाथियों को भगाने का प्रयास किया. इसके बाद हाथियों का झुंड पारसनाथ उरांव के घर पहुंच गया और वहां भी मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया.

सुंदरू पंचायत में भी एक मकान टूटा

ग्रामीणों के प्रयास के बाद हाथियों का झुंड चीरी जंगल की ओर लौट गया, लेकिन रास्ते में सुंदरू पंचायत के सुकुमार गांव पहुंचकर मनोज उरांव के मकान को भी नुकसान पहुंचाया. इस तरह एक ही रात में तीन परिवारों के मकान हाथियों के हमले की चपेट में आ गए. घटना के बाद दोनों पंचायतों के ग्रामीण पूरी रात जागकर पहरेदारी करते रहे ताकि हाथियों का झुंड दोबारा गांव में प्रवेश न कर सके.

मुखिया ने वन विभाग से मांगा मुआवजा

बुधवार सुबह चीरी पंचायत के मुखिया रामेश्वर लोहरा प्रभावित गांव पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया. उन्होंने वन विभाग को पूरे मामले की जानकारी देते हुए प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की. मुखिया ने कहा कि बरसात के मौसम में हाथियों के लगातार गांवों में पहुंचने से ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है. गरीब परिवारों के मकान और अनाज दोनों का नुकसान हुआ है, इसलिए तत्काल राहत उपलब्ध कराई जानी चाहिए.

सांसद प्रतिनिधि ने लिया नुकसान का जायजा

घटना की सूचना मिलने के बाद सांसद सुखदेव भगत के प्रखंड सांसद प्रतिनिधि लाल विकास नाथ शाहदेव भी प्रभावित गांवों में पहुंचे. उन्होंने पहले सुंदरू पंचायत के सुकुमार गांव जाकर मनोज उरांव से पूरी घटना की जानकारी ली और क्षतिग्रस्त मकान का निरीक्षण किया. इसके बाद वह चीरी पंचायत के बड़का टोली पहुंचे, जहां शनिया उरांव और पारसनाथ उरांव से मुलाकात कर नुकसान का आकलन किया. उन्होंने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया.

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वन विभाग से त्वरित कार्रवाई की मांग

सांसद प्रतिनिधि लाल विकास नाथ शाहदेव ने लोहरदगा वन प्रमंडल पदाधिकारी और कुड़ू वन क्षेत्र के प्रभारी वनपाल से दूरभाष पर बात कर पूरे मामले से अवगत कराया. उन्होंने प्रभावित परिवारों को जल्द मुआवजा दिलाने और हाथियों के झुंड को सुरक्षित वन क्षेत्र एवं हाथी कॉरिडोर की ओर भेजने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की. इस दौरान राजू टाना भगत, गुरु चरण उरांव, सुखराम उरांव, मनोज उरांव, अगस्त उरांव, शिवराम उरांव, सुनील टोप्पो, धना भगत सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो हाथियों का यह आतंक आगे भी जान-माल के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.

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Published by: Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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