लोहरदगा़ जिला राजी पड़हा व्यवस्था द्वारा उपायुक्त संदीप कुमार मीणा तथा आरक्षी अधीक्षक सादीक अनवर रिजवी का पारंपरिक अंगवस्त्र देकर स्वागत किया गया. इस दौरान सामाजिक समन्वय, पेसा कानून और पारंपरिक पड़हा व्यवस्था के अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर मांग पत्र सौंपा. मौके पर प्रतिनिधियों ने कहा कि पड़हा व्यवस्था आदिवासी समाज की प्राचीन लोकतांत्रिक शासन प्रणाली है, जो ग्राम से जिला स्तर तक समाज को संगठित रखने, समरसता बनाये रखने तथा सामूहिक हितों की रक्षा का कार्य करती है. पांचवीं अनुसूची क्षेत्र और पेसा कानून के तहत पारंपरिक ग्राम सभाओं को विशेष अधिकार प्राप्त हैं. यह व्यवस्था सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर कानून व्यवस्था, सामाजिक न्याय और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. प्रतिनिधियों ने बताया कि पूर्वजों की परंपरा के अनुसार हर तीन वर्ष में विशु सेंदरा का आयोजन किया जाता है. इसमें विभिन्न गांवों के प्रतिनिधि एकत्रित होकर सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य समाज में बढ़ रही कुरीतियों, अवैध धर्मांतरण, आदिवासी भूमि के गलत हस्तांतरण, सामाजिक विघटन और नशाखोरी जैसी गैर-पारंपरिक गतिविधियों पर रोक लगाना है. इसके अतिरिक्त, ग्राम क्षेत्रों में वन उपज, जल स्रोत, सामुदायिक भूमि और धार्मिक स्थलों के संरक्षण की निगरानी भी पारंपरिक व्यवस्था द्वारा की जाती है. समाज के प्रबुद्ध लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से इस पारंपरिक व्यवस्था को कायम रखने में सहयोग करने का अनुरोध किया. मौके पर समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोग मौजूद थे.
पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की
पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की
