बाल विवाह सामाजिक अभिशाप, कम उम्र में शादी कानूनी अपराध

बाल विवाह सामाजिक अभिशाप, कम उम्र में शादी कानूनी अपराध

सेन्हा़ प्रखंड क्षेत्र के उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बदला में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की ओर से बाल विवाह रोकथाम एवं लिंग चयनात्मक प्रथा उन्मूलन को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया. झालसा रांची के निर्देशानुसार, डालसा अध्यक्ष सह प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश राजकमल मिश्रा एवं सचिव राजेश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों से सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया गया. शिक्षा से संवारें भविष्य, शादी के लिए तय उम्र का करें पालन : मौके पर पीएलवी पुनु देवी और प्रियांशु यादव ने छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि कम उम्र में विवाह करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बड़ी बाधा है. उन्होंने जानकारी दी कि सरकार द्वारा विवाह के लिए लड़कियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गयी है. निर्धारित उम्र से पहले विवाह कराने पर माता-पिता को जेल की सजा या आर्थिक दंड भुगतना पड़ सकता है. शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ता है बुरा असर : अभियान के दौरान बताया गया कि बाल विवाह के कारण किशोरियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताएं उत्पन्न होती हैं. वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे पहले अपनी पढ़ाई पूरी कर भविष्य संवारें, उसके बाद ही विवाह के बंधन में बंधें. कार्यक्रम में शिक्षक कमलेश शर्मा, धीरज उरांव, आकाश महली, अनिशा कुमारी, पवन उरांव, प्रतिमा कुमारी, अमर उरांव, सुनैना कुमारी, छोटी कुमारी, मोनिका कुमारी समेत कई शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित थे.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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