लोहरदगा से गोपी कृष्ण कुंवर की रिपोर्ट
लोहरदगा जिले के सैलाबजिला मुख्यालय के छत्तरबगीचा स्थित स्वयंभू महादेव मंदिर लोहरदगा और आसपास के क्षेत्रों के शिवभक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. प्राकृतिक रूप से प्रकट विशाल शिवलिंग और इससे जुड़ी मान्यताएं इस शिवधाम को विशेष बनाती हैं. सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है.
कुएं की खुदाई के दौरान मिला था विशाल शिवलिंग
स्थानीय लोगों के अनुसार स्वयंभू महादेव के प्रकट होने की घटना वर्ष 2011 की है. छत्तरबगीचा में एक श्रद्धालु अपनी जमीन पर कुएं की खुदाई करा रहे थे. इसी दौरान मजदूरों का औजार जमीन के भीतर किसी कठोर वस्तु से टकराया और खुदाई करने पर वहां से लगभग छह फीट लंबा और पांच फीट व्यास का एक विशाल शिवलिंग मिला.
क्या है स्थानीय मान्यता ?
स्थानीय मान्यता के अनुसार शिवलिंग पर नाग, भगवान शिव और माता पार्वती की आकृतियां तथा जनेऊ जैसा प्राकृतिक चिह्न दिखायी देता है, जो इसे श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत विशेष बनाता है.
उत्कल स्थापत्य शैली में बना है भव्य मंदिर
शिवलिंग के प्रकट होने के बाद स्थानीय लोगों, समाजसेवियों और शिवभक्तों के सहयोग से यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. मंदिर की स्थापत्य शैली में उत्कल कला की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है. इसकी बनावट, नक्काशी और शिखर श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थापत्य कला प्रेमियों को भी आकर्षित करते हैं.
सावन में लगता है भक्तों का तांता
स्वयंभू महादेव के दर्शन के लिए वर्षभर श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन सावन में यहां विशेष रौनक रहती है. दूर-दराज से शिवभक्त पहुंचकर स्वयंभू महादेव पर जलाभिषेक करते हैं. श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से जल अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. छत्तरबगीचा का स्वयंभू महादेव आज श्रद्धा और प्रकृति के अद्भुत संगम के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है.
