आदिवासी को वनवासी कहना पहचान और ऐतिहासिक विरासत पर हमला : सांसद सुखदेव भगत

आदिवासी को वनवासी कहना पहचान और ऐतिहासिक विरासत पर हमला : सांसद सुखदेव भगत

लोहरदगा़ दिल्ली में आरएसएस और भाजपा द्वारा प्रस्तावित जनजातीय समागम को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गयी है. लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने प्रेस वार्ता कर इस आयोजन को आदिवासियों की पहचान, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत पर हमला बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के बजाय उन्हें एक विशेष सांस्कृतिक ढांचे में ढालने की कोशिश की जा रही है. आरएसएस आज तक आदिवासी शब्द को स्वीकार नहीं कर पाया है और जानबूझकर वनवासी शब्द का इस्तेमाल कर इनकी मूल पहचान को कमजोर कर रहा है. मंचों से सम्मान की बातें होती हैं, लेकिन जमीन पर आदिवासियों को सिर्फ विस्थापन और शोषण मिल रहा है. आदिवासियों की धार्मिक पहचान की अनदेखी : प्रेस वार्ता में सरना धर्म कोड का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड विधानसभा से सरना धर्म कोड की मांग पारित कर केंद्र को भेजी गयी थी, लेकिन केंद्र ने इस पर कोई सकारात्मक पहल नहीं की. उन्होंने तंज कसा कि देश में वन्य जीवों की गिनती गंभीरता से होती है, पर 15 करोड़ आदिवासियों की धार्मिक पहचान की अनदेखी की जा रही है. विकास परियोजनाओं के नाम पर छत्तीसगढ़ के हसदेव जंगलों और ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के तहत लाखों पेड़ों की कटाई कर आदिम जनजातियों को विस्थापित किया जा रहा है. नेताओं ने राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने आदिवासियों को देश का पहला और असली निवासी बताया था. उन्होंने भाजपा-आरएसएस से सांस्कृतिक नौटंकी बंद कर आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को सम्मान देने की मांग की. मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक राजेश कच्छप, रामेश्वर उरांव, पूर्व विधायक गीताश्री उरांव सहित कांग्रेस के कई नेता उपस्थित थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >