बच्चों के विरुद्ध अपराध अनुसंधान में संवेदनशील रहें : नीरजा असरी

बच्चों के विरुद्ध अपराध अनुसंधान में संवेदनशील रहें : नीरजा असरी

लोहरदगा़ झालसा, रांची के निर्देशानुसार शनिवार को सिविल कोर्ट परिसर स्थित सभागार में एक दिवसीय ””””मल्टी स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन”””” कार्यशाला का आयोजन किया गया. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकमल मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में पॉक्सो अधिनियम, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और बाल कल्याण समिति के कार्यों पर विस्तृत चर्चा हुई. कार्यशाला का शुभारंभ डीजे द्वितीय नीरजा आसरी, डालसा सचिव राजेश कुमार, एसडीपीओ वेदांत शंकर और सीडब्ल्यूसी अध्यक्षा कुंती साहू ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. साक्ष्य संकलन में सावधानी जरूरी : विशेष अदालत (महिला अपराध) की न्यायाधीश नीरजा आसरी ने कहा कि पॉक्सो एक संवेदनशील विषय है. अनुसंधानकर्ता जब्ती सूची और साक्ष्य संकलन में पूरी सावधानी बरतें. अक्सर छोटी तकनीकी खामियों के कारण आरोपी बच निकलते हैं, जिससे उनका मनोबल बढ़ता है. उन्होंने साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और न्यायालय में सही गवाही देने पर जोर दिया. मेडिकल जांच में न करें देरी : किस्को एसडीपीओ वेदांत शंकर ने पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि पॉक्सो मामले में खुद से समझौता कराने का प्रयास न करें. उन्होंने कहा कि एफआईआर के बाद पीड़िता की मेडिकल जांच जल्द से जल्द कराएं और धाराओं का चयन सोच-समझकर करें. पंजीकरण अनिवार्य, लापरवाही पर होगी सजा : डालसा सचिव राजेश कुमार ने जेजे एक्ट के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों की देखरेख करने वाली सभी संस्थाओं का पंजीकरण धारा 42 के तहत अनिवार्य है. उल्लंघन पर एक साल की सजा और एक लाख जुर्माने का प्रावधान है. उन्होंने सेक्सुअल असॉल्ट और हैरेसमेंट के बीच के अंतर को स्पष्ट किया. सदर अस्पताल की चिकित्सक ने मेडिकल प्रोटोकॉल की जानकारी दी. मौके पर एपीपी सुमन कुमार, सीडब्ल्यूसी सदस्य, पैनल अधिवक्ता और पीएलवी उपस्थित थे.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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