लोहरदगा़ आदिवासी समन्वय समिति के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार के जनजातीय कल्याण मंत्री चमरा लिंडा से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा. इसमें लोहरदगा आइटीडीए द्वारा जीइएम पोर्टल के माध्यम से नगाड़ा और मांदर क्रय के लिए निकाली गयी निविदा को तत्काल रद्द करने की मांग की गयी है. समिति ने आरोप लगाया कि 23 दिसंबर 2025 को जारी इस निविदा प्रक्रिया में स्थानीय निविदाकारों को तकनीकी कारणों का हवाला देकर बाहर कर दिया गया और बाहरी जिलों की एजेंसियों को अनुचित प्राथमिकता दी गयी. सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा है मामला : समिति के पदाधिकारियों ने मंत्री को बताया कि नगाड़ा और मांदर आदिवासी समाज के लिए मात्र वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता के प्रतीक हैं. इनके सुर-ताल और गुणवत्ता की सही समझ स्थानीय कारीगरों को ही होती है. बाहरी एजेंसियों द्वारा आपूर्ति किये जाने पर पारंपरिक स्वरूप और गुणवत्ता प्रभावित होने की पूरी आशंका है. संगठनों ने इस पूरी प्रक्रिया में घोटाले की आशंका जताते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है. कमेटी में सामाजिक जानकारों को शामिल करने की अपील : ज्ञापन में मांग की गयी कि वाद्य यंत्रों की खरीद के लिए गठित समिति में सामाजिक अगुवाओं और परंपरागत जानकारों को शामिल किया जाये, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. मौके पर अरविंद उरांव, जगदीप भगत, दिलीप कुमार उरांव, अनिल उरांव, सोमदेव उरांव, रघु उरांव, अवधेश उरांव, विजय लोहरा समेत दर्जनों प्रतिनिधि मौजूद थे. समिति ने कहा कि यदि निविदा रद्द कर स्थानीय को प्राथमिकता नहीं दी गयी, तो चरणबद्ध आंदोलन किया जायेगा.
नगाड़ा-मांदर निविदा में गड़बड़ी का आरोप, आदिवासी संगठनों ने मंत्री को सौंपा ज्ञापन
नगाड़ा-मांदर निविदा में गड़बड़ी का आरोप, आदिवासी संगठनों ने मंत्री को सौंपा ज्ञापन
