सोमवार से प्रारंभ हुई दामोदर प्रदूषण समीक्षा यात्रा, तीन जून को पंचेत धनबाद जायेगी
लोहरदगा : दामोदर नद लोहरदगा जिला के कुड़ू प्रखंड के सलगी पंचायत के चूल्हापानी नामक स्थान से निकलता है और झारखंड एवं बंगाल के राज्यों में 450 किमी की दूरी तय करते हुए कोलकाता के नीचे पवित्र गंगा में विलिन हो जाता है. उक्त बातें राज्य के मंत्री सह दामोदर बचाओ आंदोलन के प्रणेता सरयू राय ने लोहरदगा परिसदन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही.
उन्होंने कहा कि दामोदर प्रदूषण समीक्षा यात्रा सोमवार से सलगी लोहरदगा से शुरू हुई है. तीन जून को पंचेत धनबाद तक जायेगी. उन्होंने कहा कि चार जून को देवनद दामोदय महोत्सव है. इस अवसर पर उत्सव का आयोजन किया जायेगा. श्री राय ने कहा कि झारखंड में दामोदर नदी की कुल लंबाई 258 किमी और पश्चिम बंगाल में 283 किमी है. इसका जलग्रहण क्षेत्रफल झारखंड में 10,700 वर्ग किमी है और पश्चिम बंगाल में 2310 वर्ग किमी है. यह नदी झारखंड के विकास की जीवन रेखा है.
इसके किनारे झारखंड और केंद्र सरकार के कई लोक उपक्रम और कोलवाशरियां अवस्थित हैं. औद्योगिक गतिविधियों द्वारा उत्पन्न प्रदूषण के कारण दामोदर की गिनती दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में होने लगी थी. अपने उदगम से 35 किमी तक देवनद कहा जाने वाला दामोदर भीषण प्रदूषण के कारण दम तोड़ने लगा था. इसमें स्थित जैव विविधता समाप्त होने लगी थी.
अनेक स्थानों का पानी स्नान करने एवं पीने योग्य नहीं रह गया था. ऐसी स्थिति में युगांतर भारती एवं अन्य सहमना स्वयंसेवी समूहों के साझा प्रयास के रूप में दामोदर बचाओ आंदोलन का स्थापना 2004 के अप्रैल महीने में हुई. उन्होंने कहा कि एक वर्ष के अंदर दामोदर को पूर्णत: प्रदूषण मुक्त करना हमारा संकल्प है. इस संकल्प को मूर्त रूप देने के लिए सबों का सहयोग आवश्यकता है. मौके पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश सिंह, राजमोहन राम, राजकिशोर महतो सहित अन्य लोग मौजूद थे.
