लोहरदगा : जिले में घोर बिजली संकट उत्पन्न हो गया है. 24 घंटे में मात्र 6 से 8 घंटे बिजली जिले वासियों को मिल रही है. ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और भी बदतर है.भीषण गरमी के इस मौसम में न लोगों को रात में चैन है और न दिन में. बिजली विभाग के अधिकारियों से पूछने पर वही रटा रटाया जवाब मिलता है कि ऊपर से ही बिजली कम मिल रही है.
क्या कर सकते है? जबकि लोहरदगा में पावर सबस्टेशन भी है और बिजली भी पर्याप्त मिल रही है. इसके बावजूद जिले वासियों को बिजली नहीं मिल रही है. शहरी क्षेत्र में बिजली नहीं मिलने का सबसे बड़ा कारण जर्जर तारों का लगातार टूटना है. शहर में जो बिजली के तार लगे हैं वो काफी पुराने हो चुके हैं और इस गरमी में उनके टूटने का सिलसिला लगातार जारी है. जहां कहीं भी बिजली की तार टूटती है, तो पूरे शहर की बिजली काट दी जाती है.
उपभोक्ता बिल्कुल इस व्यवस्था से अजीज आ चुके हैं. लोगों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री के संसदीय क्षेत्र में जब छह घंटे बिजली मिल रही है तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है. यदि मंत्री चाहे तो इस इलाके में पूरे 24 घंटे बिजली लोगों को मिलेगी लेकिन माननीय का ध्यान यहां की जनता की समस्याओं की ओर नहीं है.
वे केंद्रीय मंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र की समस्याओं से दूर हो चुके हैं. जिले में पदस्थापित अधिकारी भी जन समस्याओं को लेकर उतने ज्यादा संवेदनशील नहीं हैं. बिजली विभाग के अधिकारी जैसा बताते हैं
वे लोग उसे ही सही मान लेते हैं जबकि पूर्व में कई उपायुक्तों ने बिजली विभाग के चेयरमैन से सीधे बात कर जिले की बिजली व्यवस्था में सुधार करवायी थी. बिजली विभाग के अधिकारी तो अभावों का रोना और संसाधनों की कमी का बहाना बना कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं लेकिन पूर्व में तमाम व्यवस्थाएं यहीं थी उसके बावजूद जिले में बिजली की बेहत्तर व्यवस्था थी. जन प्रतिनिधियों के उपेक्षा के कारण आज लोहरदगा जिला गंभीर बिजली संकट से गुजर रहा है. बिजली की कमी के कारण जलापूर्ति व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है जो कि जनता के लिए एक अलग परेशानी का कारण है.
