आश्वासन का घूंट पी रही जनता

परेशानी. बिजली और पानी की समस्या ने लोगों का किया जीना मुहाल लोहरदगा : जिले में बिजली, पानी संकट से लोगों को निजात नहीं मिल पा रहा है. गर्मी के इस मौसम में जहां लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं वहीं बिजली की आंख-मिचौनी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है. जनप्रतिनिधि पानी […]

परेशानी. बिजली और पानी की समस्या ने लोगों का किया जीना मुहाल
लोहरदगा : जिले में बिजली, पानी संकट से लोगों को निजात नहीं मिल पा रहा है. गर्मी के इस मौसम में जहां लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं वहीं बिजली की आंख-मिचौनी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है. जनप्रतिनिधि पानी के बजाय आश्वासन का घूंट पिला रहे हैं. अधिकारी व्यवस्था में सुधार की बात कह रहे हैं. जनता की परेशानियों का अंदाजा सबों को है लेकिन इस समस्या का स्थायी निदान करना कोई नहीं चाहता है.
अप्रैल के महीने से ही पेयजल की घोर किल्लत जिले में शुरू हुई. इसके साथ ही बैठकों एवं आश्वासनों का दौर भी शुरू हो गया. इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से बात होने व समस्या का स्थायी हल किये जाने की बात कही थी. लेकिन ये सिर्फ बातें थीं. बातों का क्या.
उपायुक्त ने भी संबंधित विभाग के अधिकारियों को टैंकर से जलापूर्ति शहरी क्षेत्र में करने का निर्देश दिया गया. कुछ इलाकों में टैंकर से जलापूर्ति हो रही है लेकिन टैंकर से पानी लेना सबों के आसान नहीं है. बच्चे, बुर्जूग महिलाएं पानी के लिए सड़कों पर देखे जा रहे हैं.
नहीं मिला जलापूर्ति योजना का लाभ
करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली भंडरा, अकाशी एवं कुड़ू जलापूर्ति योजना का समुचित लाभ इस क्षेत्र के ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है. जलापूर्ति के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है. उपायुक्त विनोद कुमार ने निर्देश दिया था कि जलापूर्ति योजना के संवेदकों के साथ बैठक कर इस योजना को शीघ्र चालू करायी जाये. लेकिन जब बैठक बुलायी गयी तो संवेदकों के स्थान पर उनके मुंशी बैठक में पहुंचे. इन लोगों ने बताया कि पानी की कोई कमी नहीं है लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है.
बिजली आपूर्ति का भी हाल बेहाल
वीआइपी इलाके में लगातार बिजली की आपूर्ति होती है. इससे अधिकारियों को आम जनता की परेशानी का एहसास नहीं होता है. बैठक में बिजली के जर्जर तार बदलने की सिर्फ बात कही जाती है. बराबर तार टूटने से बिजली बाधित होती है. लो-वाल्टेज की समस्या के साथ घंटो बिजली गुल रहती है. गरम दिन एवं उमस भरी रात से लोग परेशान रहते हैं. बिजली विभाग के अधिकारी संसाधनों की कमी की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. नियमित रूप से बिजली बिल जमा करने के बाद भी बिजली संकट का सामना आम जनता करती है.

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