मसियातू गांव में तीनों चापानल हैं खराब, शिकायत कर थक गये ग्रामीण, नहीं हो रही सुनवाई

अमित कुमार राज, कुड़ू ( लोहरदगा) : प्रखंड मुख्यालय से 21 किमी सलगी पंचायत का एक गांव है मसियातू. मसियातू गांव में पेयजल की व्यवस्था बनाने में जिला प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि नाकाम साबित हुए हैं. मसियातू गांव मे तुरी तथा आदिवासी समाज के लगभग चार सौ ग्रामीण रहते हैं. गांव में पेयजल के लिए […]

अमित कुमार राज, कुड़ू ( लोहरदगा) : प्रखंड मुख्यालय से 21 किमी सलगी पंचायत का एक गांव है मसियातू. मसियातू गांव में पेयजल की व्यवस्था बनाने में जिला प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि नाकाम साबित हुए हैं. मसियातू गांव मे तुरी तथा आदिवासी समाज के लगभग चार सौ ग्रामीण रहते हैं. गांव में पेयजल के लिए तीन चापानल लगाये गये हैं. तीनों खराब हैं.
गांव से आधा किलोमीटर दूर खेतों में एक चुआं बना है जो पेयजल से लेकर बर्तन धोने, कपड़ा धोने से लेकर स्नान करने के रूप में ग्रामीण इस्तेमाल करते हैं. गांव में पेयजल के लिए बोरिंग कराने की मांग वर्षों से ग्रामीण कर रहे हैं लेकिन ना तो प्रखंड प्रशासन न ही जिला प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधि कोई पहल कर रहा है. अगहन माह में ही पेयजल के लिए मसियातू गांव के ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे हैं, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जेठ माह में हालत क्या होंगे.
गांव में पेयजल की व्यवस्था कराने का प्रयास करेंगे : मुखिया
सलगी पंचायत के मुखिया बृजमोहन उरांव ने बताया कि मसियातू गांव में पेयजल की व्यवस्था कराने का प्रयास करेंगे. गांव में खराब पढ़े चापानल को दुरुस्त करायेंगे. नये चापानल के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखेंगे .
जानकारी नहीं थी, मामले की जांच करा रहे हैं : बीडीओ
बीडीओ राजश्री ललिता बाखला ने बताया कि मसियातू गांव में पेयजल समस्या के संबंध में जानकारी नहीं थी . मामला संज्ञान में आया है . पेयजल समस्या का समाधान कराने का प्रयास करेंगे .
जून में चुआं भी सूख जाता है
मसियातू गांव के ग्रामीण नीरस तुरी , चुंदेश्वर तुरी , बुधना तुरी , जयराम तुरी , दिलमोहन तुरी , किशुन तुरी , मनोज तुरी , एतवारी तुरी , सालो देवी , सीता देवी , बालो देवी , जतरी देवी , बुधनी देवी समेत अन्य ने बताया कि विधायक से लेकर सांसद तक, बीडीओ से लेकर डीसी तक , मुखिया से लेकर पीएचइडी विभाग के अधिकारियों को दर्जनों बार आवेदन देकर पानी की व्यवस्था कराने की मांग किये हैं, लेकिन सभी ने आश्वासनों की घुट्टी पिलायी. ग्रामीण बताते है कि चुआं नहीं होता तो कैसे प्यास बुझाते. जून माह में सबसे ज्यादा परेशानी होती है जब चुआं सूख जाता है .

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