लोहरदगा : सदर थाना क्षेत्र के रघुटोली कोयल नदी पर ध्वस्त पुल मौत का पुल साबित हो रहा है. पिछले 24 घंटे के दौरान इस पुल पर दो दुर्घटनाएं हुई इसमें एक मोटरसाइकिल सवार की दर्दनाक मौत हो गयी. जबकि दूसरी दुर्घटना में मोटरसाइकिल सवार दो लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. यह पुल लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से बनायी जा रही थी़ निर्माण कार्य पूरा होने के पहले ही पुल का एक स्लैब ध्वस्त हो गया. घटिया निर्माण का यह महज एक उदाहरण था.
धीरे-धीरे मामले की लीपा-पोती ग्रामीण विकास विभाग विशेष प्रमंडल के इंजीनियरों ने कर दी और पुल उसी तरह अधूरा पड़ा रहा. विभाग ने इस ध्वस्त पुल के पास न तो कोई खतरे का बोर्ड लगाया और ना ही यहां बैरेकेटिंग की, नतीजा इस पथ पर दो पहिया और चार पहिया वाहन चालक जो अंजान होते हैं वे सीधे नदी में समा जाते हैं. इस तरह की दर्जनों दुर्घटनाएं इस पुल पर घट चुकी है लेकिन इस ओर न तो जिला प्रशासन ने संबंधित विभाग को कोई निर्देश दिया और न ही पुल बनानेवाले विभाग ने ही कोई रक्षात्मक व्यवस्था की.
जबकि इसकी जानकारी समाचार पत्रों में लगातार आती रही है़ हद तो तब हो गयी जब पिछले 24 घंटे के दौरान इस पुल के कारण दो दुर्घटनाएं हो गयी. पहली दुर्घटना रविकांत उरांव पिता स्व रामकिशोर उरांव ग्राम ओयना करम टोली की हुई जो अपनी मोटरसाइकिल सीडी डिलक्स नंबर जेएच 08डी 1467 से अपने दोस्तों को गांव छोड़ कर अपने घर लौट रहा था. टूटे पुलिया से वह सीधे नदी में गिर गया. जिससे उसकी मौत हो गयी. मृतक रविकांत उरांव के भाई शशिकांत भगत ने 11 नवंबर को सदर थाना में मामला दर्ज कराते हुए कहा है कि उसका भाई टूटे पुलिया के नीचे गिर गया. जिससे उसे चोट लगी और उसकी मौत हुई है.
दूसरी घटना मोटरसाइकिल सवार मो इकबाल 35 वर्ष पिता स्व. सैयद अहमद अली ग्राम आकाशी थाना भंडरा तथा रामकुमार साहू उम्र 29 वर्ष पिता लक्ष्मी नारायण साहू ग्राम कुमहरिया थाना भंडरा जो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल जेएच 01बी एल 5873 पर सवार थे. ये लोग भी टूटे पुल की चपेट में आ गये और गंभीर रूप से घायल हो गये. इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां वे जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. आसपास के लोगों का कहना है कि पुल बनाने वाले विभाग के लोग इतने लापरवाह हैं कि उन्हें इसकी कोई परवाह भी नहीं है.
ठेकेदार अधिकांश राशि की निकासी कर चुका है उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. अब यहां फिर से नया पुल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है. सरकारी राशि के बंदरबांट का अद्भूत नमूना है यह पुल. विभाग के कार्यपालक अभियंता को जब पीड़ित लोगों के परिजनों ने इसकी जानकारी दी तो उन्होंने देख लेंगे कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया. लाचार ग्रामीणों ने साइकिल और पैदल गुजरने के लिए यहां बांस की पुलिया बना रखी है.
