भंडरा : प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी है. ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा का कोई लाभ नहीं मिल रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था केवल सरकारी रूटीन काम के लिए है. ग्रामीणों को इलाज के लिए अभी भी झोला छाप प्रैक्टिस करनेवालों पर निर्भर रहना पड़ता है.
स्वास्थ्य उप केंद्र में एएनएम या स्वास्थ्य कर्मी नियुक्त है, लेकिन स्वास्थ्य उप केंद्र नियमित रूप से नहीं खुलता है. उप केंद्रों में चिकित्सक नहीं जाते है. टीकाकरण समेत अन्य रूटीन काम यहां से होता है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भंडरा में तीन पुरुष व एक महिला डॉक्टर हैं. चारों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से व रूटीन वर्क से ही फुर्सत नहीं मिलती है.
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भंडरा में कुपोषण उपचार केंद्र भी है, जिसकी स्थिति दयनीय है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भंडरा में डॉक्टरों के आवास की सुविधा नहीं है. एक कमरे के आवास में डॉक्टर बारी-बारी से रहते है. यहां तीन एंबुलेंस है, लेकिन जब मरीजों को इसकी जरूरत होती है, तो कभी ड्राइवर नहीं मिलता है, तो कभी एंबुलेंस में तेल नहीं रहता है. इससे काफी मशक्कत के बाद मरीजों को दूसरे अस्पताल ले जाया जाता है. भंडरा में तीन एंबुलेंस के अलावा एक सूमो भी है. यहां चार वाहन पर सिर्फ एक चालक है. भंडरा अस्पताल में दवाओं की भी कमी रहती है. मरीजों को बाहर से दवा लेनी पड़ती है. सुदूर इलाकों में स्थिति और खराब है.
चिकित्सा के नाम पर यहां खानापूर्ति की जा रही है. भंडरा प्रखंड के पझरी में स्वास्थ्य उप केंद्र का निर्माण लाखों रुपये की लागत से कराया गया है, लेकिन यह भवन बेकार पड़ा है. इस संबंध में पूछने पर प्रखंड प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अरविंद कुमार आर्य ने बताया कि डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है. इस संबंध में जिले के सिविल सर्जन को कई बार सूचना दी गयी है.
स्वास्थ्य उप केंद्रों में एएनएम या स्वास्थ्य कर्मी नियुक्त, लेकिन नियमित नहीं खुलते हैं उप केंद्र
