लोहरदगा : कभी गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जानेवाला लोहरदगा नगरपालिका का पुराना भवन आज कचरा घर बन गया है. एक जुलाई 1888 को लोहरदगा नगरपालिका की स्थापना की गयी थी. बिहार-झारखंड का यह सबसे पुराना नगरपालिका है. इसके भवन की सुंदरता देखते बनती थी. हाल के दिनों में नगर परिषद द्वारा वीर शिवाजी चौक के पास नया भवन का निर्माण कराया गया, तब से यह पुराना भवन नगर परिषद के वाहनों का गैरेज बना और ठंड में इसे रैन बसेरा बनाया गया.
इसके अस्तित्व को लेकर कभी छेड़छाड़ नहीं किया गया. क्योंकि इसमें लोगों की भावना जुड़ी थी. नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने फरमान जारी कर पुराने नगर पालिका परिसर में शहर का कचरा गिरवा दिया. लोगों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह हमारे शहर की धरोहर है. यहां पर कचरा फेंकना जनप्रतिनिधियों का अपमान है. लोगों ने कहा है कि अगर 24 घंटे के अंदर यहां से कचरे को नहीं हटाया जाता है तो सडक जाम करते हुए आंदोलन किया जायेगा.
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा: इस संबंध में पूछे जाने पर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी गंगा राम ठाकुर ने बताया कि यहां पर शहर का कचरा को गिरा कर उसमें से गीला व सूखा कचरा को अलग किया जाना है. इसके लिए अंबिकापुर में नगर परिषद के नाजिर सफदर आलम व आफताब ने प्रशिक्षण लिया है. इस आधार पर यह काम हो रहा है. उन्होंने बताया कि नगर परिषद के लोगों ने थोड़ी गलती कर दी की कचरा का सभी रिक्शा एक साथ वहां गिराने के लिए भेज दिया. यदि एक एक रिक्शा जाता, तो जन विरोध नहीं होता. अभी रिसर्च किया जा रहा है कि नगर परिषद के कचरे को फेंकने के लिए कहीं जगह नहीं है.
सफाई के नाम पर लूट: नगर परिषद के लिए सफाई एक दुधारू गाय के समान है. सफाई के नाम पर अंधाधुंध लूट मची है. कचरा फेंकने के लिए पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष शिशिर टोप्पो के कार्यकाल में जुरिया में करोड़ों रुपये की लागत से जमीन खरीदी गयी थी, लेकिन जो जमीन नगर परिषद ने खरीदी वहां तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है. इसके बाद शहर के बीच मैला गढ़ा में नगर परिषद द्वारा कचरा प्रबंधन के लिए जमीन ली गयी है. वहां पर कचरा प्रबंधन के लिए शेड का निर्माण कराया गया. लेकिन वह प्रोजेक्ट में बंद कर दी गयी. नगर परिषद से जमीन के नाम पर करोड़ों का वारा न्यारा हो गया. बाद में नगर विकास की टीम ने इस जमीन को तकनीकी रूप से बेकार साबित कर दिया. जनता की करोड़ों रुपये की गाढ़ी कमाई की लूट हो गयी.
इस तरह पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष पावन एक्का के कार्यकाल में पतराटोली के पास करोड़ों रुपये की लागत से जमीन खरीदी गयी. लेकिन वह भी विवादों में घिर गया. इस मामले की निगरानी की जांच हो रही है. अभी नगर परिषद द्वारा ओयना ब्राह्मणडीहा के पास लीज में जमीन लेकर कचरा फेंकने की शुरुआत की गयी, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया. जमीन में भी लाखों रुपये लगा कर नगर परिषद ने घेराबंदी करायी है. लेकिन यह बेकार हो गया. वर्तमान समय में कहीं भी साफ सुथरी खाली जमीन नजर आ रही है, वहां नगर परिषद द्वारा कचरा फेंक दिया जा रहा है. जनप्रतिनिधि सब कुछ जानते हुए खामोश है. अधिकारियों को जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है.
लोगों ने किया विरोध, कहा
यह हमारे शहर की धरोहर है, यहां कचरा फेंकना जन प्रतिनिधियों का अपमान
24 घंटे के अंदर यहां से कचरा नहीं हटाया गया, तो सड़क जाम कर करेंगे आंदोलन
तेजी से प्रदूषण की चपेट में आ रहा है शहर
लोहरदगा शहर तेजी से प्रदूषण की चपेट में आ रहा है. गंदगी व कचरे से लोग नयी-नयी बीमारियों की चपेट में आकर असमय काल के गाल में समा रहे है. शहर में देखें, तो जगह-जगह कचरे का अंबार लगा है. नगर परिषद के अधिकारी जनता को टैक्स के नाम पर या नियम कानूनों का हवाला देकर चुप करा दे रहे है. संवेदनशील प्रशासन कहीं नजर नहीं आ रही है. नगर परिषद एक व्यापारिक प्रतिष्ठान बन गया है.
