नेतरहाट सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुपम दृश्य के साथ अधूरी प्रेम कहानी का गवाह

नेतरहाट सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुपम दृश्य के साथ अधूरी प्रेम कहानी का गवाह

By SHAILESH AMBASHTHA | December 20, 2025 10:15 PM

बेतला़ खूबसूरत वादियों के बीच स्थित नेतरहाट का अनुपम सौंदर्य अतुलनीय है. यहां का सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य इतना मनोरम है कि लोग यहां खींचे चले आते हैं. प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में बेतला पहुंचने वाले पर्यटक नेतरहाट अवश्य जाते हैं. नेतरहाट से बेतला और बेतला से नेतरहाट पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है. क्वीन ऑफ छोटानागपुर (छोटानागपुर की रानी) मानी जाने वाली नेतरहाट का शांत और ठंडा वातावरण लोगों को काफी सुकून देता है. यह झारखंड का एक प्रमुख हिल स्टेशन है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांतिपूर्ण माहौल के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है. चारों ओर ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित नेतरहाट ब्रिटिश काल से ही चर्चित रहा है. अंग्रेज यहां के ठंड और शांत वातावरण में गर्मियों में अधिकांश समय बिताने का काम करते रहे थे. देश पर राज करने के लिए अंग्रेजों ने कई नीतियों को यहीं से बनाया था. अंग्रेजों ने अपने ठहरने के लिए भी कई भवनों का निर्माण करवाया था जिसमें शैलैट हाऊस प्रमुख है. जहां अंग्रेज गवर्नर शैलैट अपना समय बिताता था. घने देवदार और साल के जंगल, मैग्नोलिया प्वांइट, नाशपाती बगान के अलावा अपर घाघरी व लोअर घाघरी झरना यहां आने वाले लोगों को भरपूर मनोरंजन देते हैं. अंग्रेज की बेटी और चरवाहे की प्रेम कहानी बयां करता है मैग्नोलिया प्वांइट : नेतरहाट में जिस जगह पर पहाड़ियों के बीच सूर्य का अस्त होता हुआ दृश्य देखा जाता है उस जगह का नाम मैग्नोलिया प्वांइट है. इस जगह की एक दुखद प्रेम कहानी है जिसमें प्रेमिका ने यहां से कूदकर अपनी जान दे दी थी. बताया जाता है कि मैग्नोलिया एक अंग्रेज ऑफिसर की बेटी थी़ उसे वहां के एक आदिवासी चरवाहे से प्रेम हो गया था. दरअसल अंग्रेज ऑफिसर की बेटी को चरवाहे की बांसुरी की धुन से प्यार हो गया था, वह काफी मधुर बांसुरी बजाता था. धीरे-धीरे मैग्नोलिया और चरवाहे की प्रेम कहानी अंग्रेज ऑफिसर को पता चली. इसके बाद उसने चरवाहे को सजा दे दी लेकिन जब इसकी जानकारी मैग्नोलिया को मिली तो वह अपने घोड़े पर बैठकर वहीं से कूद गयी जिससे उसकी मौत हो गयी़ इस तरह से इस जगह का नाम मैग्नोलिया प्वांइट पड़ा. इस स्थान पर मैग्नोलिया और चरवाहे दोनों की मूर्तियां लगायी गयी हैं जो उनकी अधूरी प्रेम कहानी का गवाह है. कैसे पहुंचे नेतरहाट : बेतला से नेतरहाट की दूरी 80 किलोमीटर है. जबकि प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर से इसकी दूरी 105 किलोमीटर है. लातेहार से इसकी दूरी करीब 80 किलोमीटर है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है