रविन्द्र गंझू की गिरफ्तारी से माओवादियों का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त, गांव में पसरा सन्नाटा

भाजपा माओवादी रीजनल कमेटी मेंबर रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी से झारखंड में नक्सलियों की कमर टूट गई है. जानें कैसे पुलिस ने इस बड़े नेटवर्क को किया ध्वस्त.

चंदवा : भाजपा माओवादी के रीजनल कमेटी मेंबर रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी के बाद पूरे पलामू प्रमंडल समेत चतरा, लोहरदगा, गुमला जिलों में माओवादियों की कमर टूट चुकी है. पुलिस को पिछले कई वर्षों से रविंद्र की तलाश थी. रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी के लिए कई बार पुलिसया अभियान चलाया गया. आए दिन न्यायालय के आदेश पर उसके घर में इश्तहार चिपकाया जा रहा था. कुर्की की कार्रवाई भी की गई, बावजूद रविंद्र ने पुलिस के नाक में दम कर रखा था. उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि है. माओवादियों का एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हो गया है. उसकी गिरफ्तारी के बाद से गांव में सन्नाटा दिखा. आम दिनों की तरह हलचल नहीं दिखाई दे रही थी. बाहरी लोगों को देखकर लोग इधर-उधर हो जा रहे है. कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे है.

कैसे बना नक्सली

रविंद्र के नक्सली बनने के पीछे भी एक बड़ी वजह है. तीन भाइयों में रविंद्र मंझीला है. लोग बताते हैं कि झारखंड निर्माण के आसपास इस क्षेत्र में नक्सलियों का बहुत बोलबाला था. उस वक्त उन्हें नेक्सलाइट कहते थे. एक बार गांव में नेक्स्लाइड का दस्ता आया, ग्रामीणों से कहा कि हमें गांव से फौजी चाहिए. उस वक्त रविंद्र की उम्र महज 8-9 साल की रही होगी. इस समय रविंद्र गंझू नेक्सलाइट के साथ चला गया. इसके बाद से उसका जीवन पूरी तरह बदल गया.

संगठन में आने के बाद की शादी

रविंद्र गंझू ने संगठन में एक लड़ाका फौजी के रूप में अपनी पहचान बनाई थी. वह गोरिल्ला युद्ध में माहिर था. बहुत कम समय में वह एरिया कमांडर के बाद रीजनल सदस्य तक पहुंच गया था. संगठन में आने के बाद रविंद्र ने ललिता देवी से शादी की थी. इससे उनके पांच बच्चे भी है. पत्नी ललिता की माने तो पिछले करीब 5 वर्ष से उसने संगठन से दूरी बना ली थी.

नशा व मोबाइल से रहता था दूर

रविंद्र की इतने लंबे समय तक पुलिस गिरफ्त में नहीं आने का मुख्य कारण उसका नशा नहीं करना एवं मोबाइल से दूरी था. लोग बताते हैं कि शराब तो दूर वह बीड़ी सिगरेट भी नहीं पीता. जब वह सक्रिय रूप से दस्ते में था तो अपना एवं पूरे दस्त की सुरक्षा की तमाम खुद देखता था. उसकी सुरक्षा चार चक्र में होती थी. वह मोबाइल नहीं रखता था इससे पुलिस को उसके मूवमेंट की जानकारी नहीं मिल पाती थी.


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Author: Sumit kumar

Published by: Amleshnandan Sinha

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