लीड के साथ :: रविंद्र की गिरफ्तारी से माओवादियों का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त, गांव में सन्नाटा
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माओवादी रीजनल कमेटी मेंबर रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी से झारखंड में नक्सलियों की कमर टूट गई है। जानें कैसे पुलिस ने इस बड़े नक्सली नेटवर्क को किया ध्वस्त।
फोटो : 14 चांद 2 : रविंद्र के घर के बाहर मौजूद लोग.
सुमित कुमार, चंदवा भाजपा माओवादी के रीजनल कमेटी मेंबर रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी के बाद पूरे पलामू प्रमंडल समेत चतरा, लोहरदगा, गुमला जिलों में माओवादियों की कमर टूट चुकी है. पुलिस को पिछले कई वर्षों से रविंद्र की तलाश थी. रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी के लिए कई बार पुलिस ने अभियान चलाया. आये दिन न्यायालय के आदेश पर उसके घर में इश्तहार चिपकाया जा रहा था. कुर्की की कार्रवाई भी की गयी, बावजूद रविंद्र ने पुलिस के नाक में दम कर रखा था. उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि है. माओवादियों का एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हो गया है. उसकी गिरफ्तारी के बाद से गांव में सन्नाटा दिखा. आम दिनों की तरह हलचल नहीं दिखायी दे रही थी. बाहरी लोगों को देखकर लोग इधर-उधर हो जा रहे हैं. कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं.
कैसे बना नक्सली : रविंद्र के नक्सली बनने के पीछे भी एक बड़ी वजह है. तीन भाइयों में रविंद्र मंझीला है. लोग बताते हैं कि झारखंड निर्माण के आसपास इस क्षेत्र में नक्सलियों का बहुत बोलबाला था. उस वक्त उन्हें नक्सलाइट कहते थे. एक बार गांव में नक्सलाइट का दस्ता आया, ग्रामीणों से कहा कि हमें गांव से फौजी चाहिए. उस वक्त रविंद्र की उम्र महज 8-9 साल की रही होगी. इस समय रविंद्र गंझू उनके साथ चला गया. इसके बाद से उसका जीवन पूरी तरह बदल गया.
संगठन में आने के बाद की शादी : रविंद्र गंझू ने संगठन में एक लड़ाका फौजी के रूप में अपनी पहचान बनायी थी. वह गोरिल्ला युद्ध में माहिर था. बहुत कम समय में वह एरिया कमांडर के बाद रीजनल सदस्य तक पहुंच गया था. संगठन में आने के बाद रविंद्र ने ललिता देवी से शादी की थी. इससे उनके पांच बच्चे भी हैं. पत्नी ललिता की माने तो पिछले करीब पांच वर्ष से उसने संगठन से दूरी बना ली थी.
नशा व मोबाइल से रहता था दूर : रविंद्र की इतने लंबे समय तक पुलिस गिरफ्त में नहीं आने का मुख्य कारण उसका नशा नहीं करना एवं मोबाइल से दूरी था. लोग बताते हैं कि शराब तो दूर वह बीड़ी-सिगरेट भी नहीं पीता. जब वह सक्रिय रूप से दस्ते में था तो अपना एवं पूरे दस्त की सुरक्षा का इंतजाम खुद देखता था. उसकी सुरक्षा चार चक्र में होती थी. वह मोबाइल नहीं रखता था इससे पुलिस को उसके मूवमेंट की जानकारी नहीं मिल पाती थी.
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