राजयोगिनी शांति दीदी को किया गया सम्मानित

प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़कर 1971 से काम कर रही राजयोगिनी शांति दीदी के नि:स्वार्थ योगदान पर उन्हें सोमवार को कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया गया.

चंदवा. प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़कर 1971 से काम कर रही राजयोगिनी शांति दीदी के नि:स्वार्थ योगदान पर उन्हें सोमवार को कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया गया. नशा मुक्त भारत अभियान के तहत आयोजित यह विशेष कार्यक्रम सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के बैनर तले आयोजित था. ख्रीस्त राजा उच्च विद्यालय परिसर में इसकी शुरुआत की गयी. नशे के दुष्प्रभाव व इससे बचाव के उपायों पर प्रकाश डाला गया. बीके पूर्णिमा बहन ने जीवन में सच्ची सुख-शांति प्राप्त करने के आध्यात्मिक उपायों पर जोर दिया. कहा कि नशा ऐसा दलदल है, जो लोगों को शारीरिक, मानसिक व सामाजिक रूप से खोखला कर देता है. इसकी शुरुआत अक्सर जिज्ञासा या साथियों के दबाव में हो सकती है. माताओं को जागरूक करते हुए कहा कि घर का वातावरण व बच्चों के साथ संवाद कर नशे की रोकथाम की जा सकती है. अन्य लोगों ने कहा कि नशे की गिरफ्त में आने का एक बड़ा कारण तनाव व अवसाद है. आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव के कारण युवा आसानी से नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं. ब्रह्मकुमारी संस्था ने समाज सेवा में समर्पित राजयोगिनी शांति दीदी को सम्मानित किया. उन्होंने कहा कि नशा मुक्त जीवन के प्रति जागरूकता फैलाना ही कार्यक्रम का उद्देश्य था. मंच संचालन बीके शिव भाई कर रहे थे. कार्यक्रम के बाद अज्ञान नींद से जागो कुंभकरण से संबंधित आकर्षक झांकी निकाली गयी.

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Author: DEEPAK

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