50 वर्षों से भौगोलिक और प्रशासनिक विसंगति से जूझ रहा है पलामू टाइगर रिजर्व

50 वर्षों से भौगोलिक और प्रशासनिक विसंगति से जूझ रहा है पलामू टाइगर रिजर्व

बेतला़ झारखंड का इकलौता बाघ अभयारण्य, पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) पिछले 50 वर्षों से एक गंभीर भौगोलिक और प्रशासनिक विसंगति से जूझ रहा है. 1129 वर्ग किलोमीटर में फैले इस रिजर्व के सभी आठों वन प्रक्षेत्र, रेंज (बेतला नेशनल पार्क, छिपादोहर पूर्वी, छिपादोहर पश्चिमी, कुटकु, गारू पूर्वी, गारू पश्चिमी, बारेसांढ़ और महुआडांड़) लातेहार जिले की सीमा में आते हैं, लेकिन इसका मुख्य नियंत्रण केंद्र (मुख्यालय) पड़ोसी जिले पलामू के मेदिनीनगर में स्थित है. मतलब इस रिजर्व की पूरी जमीन लातेहार जिले में है, लेकिन इसका मुख्य प्रशासनिक दफ्तर पड़ोसी जिले पलामू से चलता है. वरिष्ठ अधिकारी पलामू में बैठकर लातेहार के जंगलों की निगरानी कर रहे हैं. लातेहार के जंगलों की सुरक्षा का रिमोट कंट्रोल पलामू में होना आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है. यह अजीबोगरीब व्यवस्था पिछले पांच दशकों से लगातार जारी है. वित्तीय आवंटन से लेकर संरक्षण की रणनीतियों तक के सभी बड़े फैसले मेदिनीनगर में : वर्ष 1973-74 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत गठन के बाद से ही पीटीआर का सर्वोच्च कार्यालय मेदिनीनगर के कचहरी रोड स्थित फॉरेस्ट कॉलोनी से संचालित हो रहा है. फील्ड डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर समेत सभी आला अधिकारी पलामू में बैठते हैं और वित्तीय आवंटन से लेकर संरक्षण की रणनीतियों तक के सभी बड़े फैसले यहीं से होते हैं. इस कारण फील्ड में तैनात रहने वाले अधिकारियों को हर छोटे-बड़े प्रशासनिक और कागजी कामों के लिए लातेहार के जंगलों से निकलकर मेदिनीनगर मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है. वन विभाग के ढांचे के मुताबिक सुरक्षा की सीधी कमान रेंजर (आरएफओ) के हाथों में होती है. 25 से 100 किमी की दूरी और रेंजों पर बढ़ता प्रशासनिक बोझ : मुख्यालय से रेंजों की अत्यधिक भौगोलिक दूरी के कारण फील्ड स्तर पर त्वरित फैसले लेने और समन्वय बिठाने में अक्सर बड़ी चुनौती आती है. मेदिनीनगर मुख्यालय से विभिन्न रेंजों की सड़क मार्ग से दूरी इस प्रकार है़ बेतला 25 किमी, छिपादोहर पूर्व 35 से 40 किमी, छिपादोहर पश्चिम 40 से 45 किमी, कुटकु 50 से 55 किमी, गारू पूर्व 60 किमी, गारू पश्चिम 65 किमी, बारेसांढ़ 85 किमी, महुआडांड़ 100 किमी़ पीटीआर की भौगोलिक सीमाएं और आंतरिक विभाजन : यह क्षेत्र उत्तर में औरंगा नदी से घिरा हुआ है. इसके अलावा उत्तरी कोयल और बूढ़ा नदी भी यहां से बहती हैं. दक्षिण में यह नेतरहाट के घने जंगलों से जुड़ा हुआ है. पूर्व की तरफ लातेहार वन विभाग स्थित है जबकि पश्चिम में यह गढ़वा वन विभाग और छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की सीमाओं को छूता है. कोर एरिया इसका मुख्य संरक्षित क्षेत्र लगभग 414.08 वर्ग किमी में फैला है, जहां मानवीय गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हैं. जबकि बफर एरिया बाहरी सुरक्षा चक्र या बफर जोन लगभग 715.85 वर्ग किमी का है, जिसमें कई वन गांव शामिल हैं.

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