बेतला़ विश्व प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क के समीपवर्ती क्षेत्रों में जल संचयन का मुख्य आधार माना जाने वाला कुल्ही नाला चेकडैम टूटने से स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीवों के लिए गंभीर संकट खड़ा हो गया है. पिछले वर्ष हुई भारी बारिश के दौरान इस वर्षों पुराने चेकडैम का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था, जिसकी मरम्मत अब तक नहीं हो सकी है. इसके परिणामस्वरूप चेकडैम में जल संचयन पूरी तरह ठप हो गया है और कभी सालों भर लबालब रहने वाला कुल्ही नाला अब सूखने के कगार पर पहुंच गया है. वन्यजीवों के समक्ष गंभीर संकट : इससे चेकडैम पर आश्रित रहने वाले हजारों बंदर, हिरण, बायसन, जंगली सुअर और हाथियों जैसे वन्यजीवों को अब भीषण गर्मी में पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि पानी की कमी से जानवर रिहायशी इलाकों का रुख कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव द्वंद्व की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. किसानों और पशुपालकों की चिंता बढ़ी : वहीं, कुटमू, डोरामी, कल्याणपुर और कंचनपुर सहित आधा दर्जन गांवों के किसानों और पशुपालकों की चिंता भी बढ़ गयी है. इस नाले के पानी से न केवल फसलों की सिंचाई होती थी, बल्कि इलाके के हजारों पालतू मवेशियों की प्यास भी बुझती थी. साथ ही क्षेत्र भू-गर्भ जल स्तर काफी ऊपर रहता था, लेकिन अब संचयन रुकने से कुओं और बोरिंग के सूखने का डर सताने लगा है. स्थानीय किसानों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से अविलंब चेकडैम की मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि आने वाली गर्मियों में जल संकट विकराल रूप न ले सके.
चेकडैम टूटने के बाद कुल्ही नाला सूखने के कगार पर
चेकडैम टूटने के बाद कुल्ही नाला सूखने के कगार पर
